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    जब भीम को हुआ अपनी ताकत पर घमंड, हनुमान जी ने एक वृद्ध वानर बन ऐसे तोड़ा अहंकार

    Updated: Sun, 03 May 2026 07:45 PM (IST)

    एक बार महाबली भीम को अपनी शक्ति पर भारी घमंड हो गया था। तब हनुमान जी ने एक वृद्ध वानर का रूप धरकर उनका घमंड समाप्त किया। आइए उस कथा के बारे में जानते ...और पढ़ें

    भीम का अहंकार और हनुमान जी की लीला। Ai Generated image

    भीम का अहंकार और हनुमान जी की लीला। Ai Generated image

    HighLights

    1. भीम में 10 हजार हाथियों का बल था

    2. हनुमान जी वृद्ध वानर के रूप में भीम के सामने आएं

    3.  हनुमान जी ने भीम को दिया विजयी का आशीर्वाद 

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। यह कथा उस समय की है, जब पांडव वनवास काट रहे थे। एक दिन द्रौपदी ने हवा में बहकर आए एक दिव्य और सुगंधित पुष्प को देखा और भीम से वैसे ही पुष्प लाने की विनती की। भीम, जो अपनी गदा और बाहुबल के लिए जाने जाते थे, उस पुष्प की खोज में निकल पड़े। रास्ते में भीम को जो भी वृक्ष या शिला मिली, उन्होंने उसे अपनी शक्ति से उखाड़कर फेंक दिया। वे यह सिद्ध करना चाहते थे कि उनके मार्ग में आने की शक्ति किसी में नहीं है।

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    वृद्ध वानर के रूप में हनुमान जी ऐसे आएं सामने

    भीम के मार्ग में एक बूढ़ा वानर लेटा हुआ था, जिसकी पूंछ रास्ते के बीचों-बीच थी। भीम ने भारी आवाज में वानर से पूंछ हटाने को कहा। उस वृद्ध वानर जो कि असल में हनुमान जी थे। उन्होंने कहा, 'हे वीर! मैं वृद्ध हूं, स्वयं हिलने में असमर्थ हूं। अगर आपको आगे जाना है, तो आप खुद मेरी पूंछ एक ओर हटा दें और निकल जाएं।'

    भीम को यह सुनकर बड़ा गुस्सा आया। उन्होंने सोचा कि एक साधारण वानर की पूंछ हटाना उनके लिए बाएं हाथ का खेल है। लेकिन जब उन्होंने पूंछ हटाने का प्रयास किया, तो वह टस से मस नहीं हुई।

    ऐसे टूटा महाबली भीम का घमंड

    भीम ने अपनी पूरी शक्ति झोंक दी, जिस भीम में 10 हजार हाथियों का बल था, जो पहाड़ों को हिला सकते थे, वे एक वानर की पूंछ को जरा भी नहीं उठा पाए। भीम पसीने-पसीने हो गए और उनका चेहरा उतर गया। उन्हें तुरंत आभास हो गया कि यह कोई साधारण वानर नहीं है।

    भीम ने हाथ जोड़कर क्षमा मांगी और पूछा कि हे महाबली! आप कौन हैं? कृपया अपना वास्तविक परिचय दें। तब हनुमान जी अपने असली स्वरूप में आए और भीम को बताया कि वे उनके बड़े भाई हैं, क्योंकि दोनों ही पवनपुत्र हैं।

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    फिर हनुमान जी ने दिया आशीर्वाद

    हनुमान जी ने भीम को समझाया कि शक्ति का उपयोग दूसरों की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए होना चाहिए, न कि अपने घमंड व दूसरों को परेशान करने के लिए। उन्होंने भीम को अपना वह विशाल रूप दिखाया जो उन्होंने समुद्र लांघते समय धारण किया था। अंत में हनुमान जी ने भीम को आशीर्वाद दिया कि महाभारत के युद्ध में वे अर्जुन के रथ की ध्वजा पर विराजमान रहेंगे और उनकी मदद करेंगे।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।