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    Holika Dahan 2026: होलिका दहन की पूजा में क्यों जरूरी हैं 4 उपले? एक छोटी सी परंपरा के पीछे छिपा है बड़ा रहस्य

    Updated: Fri, 27 Feb 2026 03:23 PM (IST)

    होली से पहले होलिका दहन का विशेष महत्व है, जहां नकारात्मकता को जलाया जाता है। इस दौरान गाय के गोबर से बने चार उपलों को अलग से निकालने की परंपरा है, आइ ...और पढ़ें

    Holika Dahan 2026: होलिका दहन की पूजा।

    Holika Dahan 2026: होलिका दहन की पूजा।

    HighLights

    1. होली का त्योहार खुशियों और नई उमंग भरने वाला माना जाता है

    2. इस साल 3 मार्च को रंगों वाली होली खेली जाएगी

    3. होली का पर्व शुभता का प्रतीक है

    दिव्या गौतम, एस्ट्रोपत्री। हिंदू धर्म में होली का त्योहार खुशियों और नई उमंग भरने वाला माना जाता है। इस साल 3 मार्च को रंगों वाली होली खेली जाएगी, लेकिन उससे पहले 2 मार्च की शाम को होने वाला होलिका दहन बहुत खास है। होलिका की अग्नि में हम केवल लकड़ियां ही नहीं जलाते, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों और नकारात्मकता को भी विदा करते हैं। इस दिन गाय के गोबर से बने उपलों या बड़कुलों का विशेष महत्व है।

    अक्सर घर के बड़े-बुजुर्ग होलिका दहन से पहले चार उपले अलग से निकालने के लिए कहते हैं। इसके पीछे बहुत ही सुंदर धार्मिक कारण छिपे हैं, जो सीधे हमारे परिवार की खुशहाली और सुरक्षा से जुड़े हुए हैं।

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    Ai Generated Image

    चार उपलों का महत्व और पितरों का आशीर्वाद

    शास्त्रों के अनुसार, होलिका दहन के समय निकाले जाने वाले ये चार उपले अलग-अलग उद्देश्यों के लिए समर्पित होते हैं। इनमें से पहला उपला हमारे पितरों के नाम का होता है। ऐसी मान्यता है कि पितरों का आशीर्वाद मिलने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और किसी भी प्रकार के पितृ दोष की आशंका कम हो जाती है।

    जब हम श्रद्धा के साथ अपने पूर्वजों को याद करते हुए यह उपला निकालते हैं, तो यह उनके प्रति सम्मान दिखाने का एक सरल तरीका है। इससे परिवार के संचालन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और घर के सदस्यों को मानसिक शांति मिलती है। 

    हनुमान जी और नकारात्मक शक्तियों से बचाव

    दूसरा उपला संकटमोचन हनुमान जी के नाम का निकाला जाता है। होलिका दहन के दिन उनकी पूजा करने से घर पर किसी भी बुरी नजर का साया पड़ने की आशंका कम हो जाती है। ऐसी मान्यता है कि हनुमान जी के नाम का उपला निकालने से घर के चारों ओर एक सुरक्षा कवच बन जाता है, जिससे नकारात्मक शक्तियों के प्रवेश का डर समाप्त हो जाता है।

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    यह छोटा सा कार्य हमारे भीतर साहस भरता है और हमें मानसिक रूप से मजबूत बनाता है। हमारे बुजुर्ग हमेशा यही सिखाते हैं कि सच्चे विश्वास के साथ की गई यह परंपरा हमें आने वाले संकटों से बचाने में सहायक सिद्ध होती है। इससे घर के माहौल में नई और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    शीतला माता और मां लक्ष्मी की विशेष कृपा

    तीसरा उपला शीतला माता के नाम का और चौथा मां लक्ष्मी के नाम का निकाला जाता है। शीतला माता को रोगों से बचाने वाली देवी माना गया है। होली के समय जब मौसम बदल रहा होता है, तब बीमारियों के संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है, ऐसे में शीतला माता का आशीर्वाद हमें सेहतमंद रखने में मदद करता है। वहीं, मां लक्ष्मी के नाम का उपला घर में धन-धान्य और बरकत लाने के लिए निकाला जाता है।

    यह पूजन हमें सिखाता है कि हम जो भी करें, वह परिवार और समाज की भलाई के लिए हो। जब हम मां की कृपा पाने के लिए इन परंपराओं को निभाते हैं, तो जीवन की सभी बड़ी इच्छाएं पूरी होती हैं।

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    लेखक: दिव्या गौतम, Astropatri.com अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए hello@astropatri.com पर संपर्क करें।