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    Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या पर सिर्फ मौन रखने से कैसे मिलती है आत्मशुद्धि और मानसिक शांति?

    Updated: Thu, 15 Jan 2026 03:03 PM (IST)

    सनातन धर्म में मौनी अमावस्या को मौन, संयम और आत्मशुद्धि का पवित्र पर्व माना जाता है। 2026 में यह 18 जनवरी की रात से 19 जनवरी की रात तक रहेगी। मौनी अमा ...और पढ़ें

    मौनी अमावस्या 2026 (Image Source: AI-Generated)

    मौनी अमावस्या 2026 (Image Source: AI-Generated)

    दिव्या गौतम, एस्ट्रोपत्री। सनातन धर्म में मौनी अमावस्या को मौन, संयम और आत्मशुद्धि (self purification through Maun Vrat) से जुड़ा अत्यंत पवित्र पर्व माना गया है। वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या 18 जनवरी की रात 12:03 बजे से प्रारंभ होकर 19 जनवरी की रात 1:21 बजे तक रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मौन व्रत धारण करने से मन, वाणी और कर्म की शुद्धि होती है। शास्त्रों में बताया गया है कि मौनी अमावस्या पर मौन का पालन करने से साधक बाहरी विक्षेपों से दूर होकर आत्मचिंतन की अवस्था में प्रवेश करता है। यही कारण है कि यह तिथि आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक संतुलन के लिए विशेष मानी गई है।

    मौनी अमावस्या पर मौन व्रत का धार्मिक कारण

    मौनी अमावस्या पर मौन व्रत का संबंध वाणी संयम और आत्मनियंत्रण से जुड़ा माना गया है। शास्त्रों के अनुसार वाणी से उत्पन्न दोष व्यक्ति के कर्म बंधन को मजबूत करते हैं। जब साधक मौन धारण करता है, तो वाणी के साथ मन भी शांत होने लगता है। अमावस्या तिथि स्वयं की अंतर्मुखी ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है, इसलिए इस दिन मौन व्रत आत्मा को भीतर की यात्रा का अवसर देता है। पितृ तर्पण और साधना के साथ किया गया मौन व्रत मन के विकारों को शांत करता है। यही कारण है कि ऋषि परंपरा में मौनी अमावस्या को मौन साधना का श्रेष्ठ दिन बताया गया है।

    मौन व्रत से मिलने वाले आध्यात्मिक लाभ (Mauni Amavasya 2026 silence benefits)

    Maun 2026

    (Image Source: AI-Generated)

    मौनी अमावस्या पर किया गया मौन व्रत साधक को गहरे आध्यात्मिक लाभ प्रदान करता है। मान्यता है कि मौन से मन की चंचलता कम होती है और ध्यान में स्थिरता आती है। जब शब्दों का त्याग होता है, तब चेतना अधिक जाग्रत हो जाती है। इससे साधक अपने भीतर के संस्कारों को समझ पाता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि मौन व्रत से कर्म दोष शिथिल होते हैं और आत्मा पर जमी अशुद्धियां धीरे धीरे समाप्त होने लगती हैं। यह व्रत साधक को धैर्य, संतुलन और आत्मविश्वास प्रदान करता है, जिससे जीवन में सकारात्मक दृष्टि विकसित होती है।

     

    मानसिक और जीवन संतुलन में मौन की भूमिका (Mental Peace On Amavasya)

    मौनी अमावस्या का मौन व्रत केवल धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि जीवन संतुलन का भी प्रभावी माध्यम माना गया है। मौन से तनाव कम होता है और विचारों में स्पष्टता आती है। जब व्यक्ति बोलने से अधिक सुनता और समझता है, तो उसके निर्णय अधिक संतुलित हो जाते हैं। इस दिन का मौन व्रत व्यक्ति को क्रोध, जल्दबाजी और नकारात्मक भावनाओं से दूर रहने की प्रेरणा देता है। पारिवारिक और सामाजिक जीवन में भी इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई देता है। धार्मिक दृष्टि से मौनी अमावस्या का मौन व्रत जीवन को सरल, शांत और आत्मकेंद्रित बनाने की प्रेरणा देता है।

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    लेखक: दिव्या गौतम, Astropatri.com अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए hello@astropatri.com पर संपर्क करें।