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पूजा-पाठ और हवन में क्यों होता है घी का इस्तेमाल? इसके पीछे है गहरा रहस्य

Updated: Tue, 25 Aug 2026 11:20 AM (IST)

हिंदू धर्म में पूजा-पाठ, हवन और आरती के दौरान गाय के घी का ही इस्तेमाल क्यों होता है? जानिए घी ...और पढ़ें

गाय के घी का ही इस्तेमाल क्यों? (AI-Generated Image)

गाय के घी का ही इस्तेमाल क्यों? (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हम सभी के घरों में नियमित रूप से भगवान की पूजा-पाठ होती है। इस दौरान फूल, धूप, कपूर, चंदन और प्रसाद जैसी कई पवित्र सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन, इन सबमें 'घी' का एक अपना अलग और बेहद खास स्थान है। आपने गौर किया होगा कि भगवान की आरती उतारनी हो, घर के मंदिर में दीपक जलाना हो या फिर कोई हवन करना हो, हर जगह घी का इस्तेमाल जरूर किया जाता है।

लेकिन, क्या आपने कभी गहराई से सोचा है कि पूजा में घी को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना गया है? पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा के पीछे गहरा आध्यात्मिक रहस्य छिपा है आइए समझते हैं।

घी का दीपक जलाने के पीछे का रहस्य

हिंदू धर्म में दीपक को रोशनी और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। मान्यता यह भी है कि घी का दीपक जलाने से जीवन से अंधकार और अज्ञानता दूर होती है। जब हम सुबह-शाम घर के मंदिर में घी का दीपक जलाते हैं, तो उसकी लौ हमारे कमरे में प्रकाश ही नहीं फैलाती बल्कि घर से सारी नकारात्मक ऊर्जा (नेगेटिविटी) को बाहर निकालकर एक सकारात्मक और खुशनुमा माहौल बनाती है। यह भगवान के सामने हमारी सच्ची श्रद्धा और प्रार्थना का प्रतीक है।

हवन और यज्ञ में क्यों जरूरी है घी?

शादी-ब्याह, गृह प्रवेश या कोई भी धार्मिक अनुष्ठान हवन के बिना अधूरा माना जाता है। हवन के दौरान मंत्रों के उच्चारण के साथ अग्नि में घी की आहुति दी जाती है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, अग्नि देव को सभी देवताओं का मुख माना गया है। अग्नि के जरिए ही हमारी आहुति सीधे देवी-देवताओं तक पहुंचती है। हवन में घी चढ़ाना इस बात का प्रतीक है कि हम पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ ईश्वर की वंदना कर रहे हैं।

कर्मकांड की प्रामाणिक पुस्तक 'नित्यकर्म पूजा प्रकाश' के एक श्लोक में भी इसका वर्णन मिलता है-

गव्यं घृतं सुसंपूर्णम् वर्तिना सह योजितम्।
दीपेन ते नमो देव प्रसन्ना भव सर्वदा॥

इसका अर्थ है- हे देव! गाय के शुद्ध घी से परिपूर्ण और बाती के साथ जलते इस दीपक को मैं आपको अर्पित करता/करती हूं। आप मेरे इस दीप को स्वीकार करें और सदैव मुझ पर प्रसन्न रहें।

गाय का घी ही क्यों है पवित्र?

सनातन परंपरा में गाय को माता के समान दर्जा दिया गया है। गाय के दूध से बनी हर चीज को बहुत शुद्ध और 'सात्विक' माना जाता है। वास्तु और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भी सात्विक चीजों से पूजा करने से मन शांत रहता है और भगवान में ध्यान लगाना आसान हो जाता है। यही वजह है कि पंचामृत बनाने से लेकर भगवान के भोग और दीपक तक में गाय के शुद्ध घी को सर्वोच्च स्थान दिया गया है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न       माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।