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    पूजा में क्यों जरूरी है मंगल कलश? जानें इसके पीछे का धार्मिक रहस्य

    Updated: Tue, 17 Feb 2026 05:48 PM (IST)

    Importance of Kalash in Pooja: हिंदू धर्म में बिना कलश स्थापना के कोई भी पूजा पूरी क्यों नहीं मानी जाती? जानें कलश में किन देवताओं का वास होता है और इ ...और पढ़ें

    पूजा में क्यों जरूरी है कलश स्थापना? (Image Source: AI-Generated)

    पूजा में क्यों जरूरी है कलश स्थापना? (Image Source: AI-Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में कोई भी पूजा, अनुष्ठान या मांगलिक कार्य तब तक अधूरा माना जाता है, जब तक वहां 'कलश' की स्थापना न हो जाए। कलश को केवल जल का पात्र नहीं, बल्कि साक्षात ब्रह्मांड का प्रतीक माना गया है। चलिए, जानते हैं आखिर पूजा में कलश का इतना महत्व क्यों है और इसके पीछे की आध्यात्मिक मान्यताएं क्या हैं।

    कलश का आध्यात्मिक रहस्य?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश के मुख, कंठ और मूल (नीचे के हिस्से) में देवताओं का वास माना जाता है। शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि कलश के मुख में भगवान विष्णु (Lord Vishnu), कंठ में भगवान शिव (Lord Shiva) और मूल में ब्रह्मा जी का निवास होता है। साथ ही, कलश के मध्य भाग में मातृशक्तियों और पवित्र नदियों का आह्वान किया जाता है।

    शास्त्रों के मुताबिक, कलश की स्थापना करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का संचार होता है। यह पात्र समुद्र मंथन के समय निकले अमृत कलश का प्रतीक है, जो सुख और समृद्धि का प्रतिनिधित्व करता है।

    Kalash impo

    (Image Source: AI-Generated)

    कलश स्थापना की सही विधि और नियम

    पूजा में कलश स्थापित करते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, तभी इसका पूर्ण फल प्राप्त होता है:

    पात्र का चुनाव: कलश हमेशा सोना, चांदी, तांबा या मिट्टी का होना चाहिए। लोहे या स्टील के पात्र का प्रयोग वर्जित माना गया है।

    कलश में क्या डालें: कलश के भीतर शुद्ध जल के साथ गंगाजल, अक्षत (चावल), कुमकुम, दूर्वा, सिक्का और सुपारी डाली जाती है।

    आम के पत्ते: कलश के ऊपर पंच पल्लव (अक्सर आम या अशोक के पत्ते) रखे जाते हैं, जो जीवन में हरियाली और खुशहाली का प्रतीक हैं।

    नारियल की दिशा: कलश पर रखे नारियल का मुख हमेशा साधक (पूजा करने वाले) की ओर होना चाहिए।

    विशेष तथ्य: पूजा के दौरान पंडित और विद्वान बताते हैं कि कलश की स्थापना से आसपास की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है और पूजा स्थल एक पवित्र मंडल में बदल जाता है। कलश को 'तीर्थों' का स्वरूप भी माना जाता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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