यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 20, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Jagannath Rath Yatra 2024: कब से शुरू हो रही है जगन्नाथ रथ यात्रा, यहां जानिए सारी जानकारी
भगवान जगन्नाथ जी की रथ यात्रा विश्वभर में प्रसिद्ध है। इस रथ यात्रा में भाग लेने के लिए दूर-दूर से लोग यहां पहुचते हैं। इस भव्य यात्रा में लाखों लोगों ...और पढ़ें

HighLights
- हर साल निकाली जाती है जगन्नाथ रथ यात्रा।
- भव्य रथों पर सवार होते हैं जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा।
- जल्द शुरू होने जा रही है पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Puri Ratha Yatra 2024: जगन्नाथ का अर्थ है 'ब्रह्मांड के भगवान'। भगवान जगन्नाथ को भगवान विष्णु का ही अवतार माना जाता है। हर साल ओडिशा के पुरी शहर में रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है। इस त्योहार के दिन मुख्य रूप से तीन देवताओं की पूजा की जाती है, जिसमें भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और उनकी बहन सुभद्रा शामिल है।
इस दिन से हो रही है शुरू
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि का प्रारम्भ 07 जुलाई, 2024 को प्रातः 04 बजकर 26 मिनट पर हो रहा है। वहीं इस तिथि का समापन 08 जुलाई, 2024 को प्रातः 04 बजकर 59 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार 2024 में जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत 07 जुलाई से हो रही है।
क्यों निकाली जाती है यात्रा

ज्येष्ठ मास के पूर्णिमा तिथि के दिन भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलभद्र को गर्भगृह से बाहर लाकर स्नान कराया जाता है। माना जाता है कि इसके बाद भगवान जगन्नाथ बीमार पड़ जाते हैं और उन्हें बुखार आ जाता है, जिस कारण वह 15 दिनों तक शयन कक्ष में विश्राम करते हैं। इस दौरान भक्तों को दर्शन की अनुमति होती। इसके बाद आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन वह स्वस्थ होकर अपने विश्राम कक्ष से बाहर आते हैं। इस खुशी में भव्य रथ यात्रा निकाली जाती है।
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कैसे की जाती है यात्रा
भव्य पुरी रथयात्रा के लिए बलराम, श्रीकृष्ण और देवी सुभद्रा के लिए तीन अलग-अलग रथों का निर्माण किया जाता है। सबसे आगे बलराम जी का रथ चलता है, बीच में बहन सुभद्रा और सबसे पीछे भगवान जगन्नाथ जी का रथ चलता है। विशालकाय रथों पर विराजमान होकर भगवान, मौसी के घर गुंडिचा मंदिर जाते हैं, जहां वह कुछ दिनों के लिए विश्राम करते हैं। इसके बाद वह पुनः अपने घर लौट आते हैं।
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