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    ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा पर इस शुभ मुहूर्त में करें स्नान-दान, जानें तिथि और पूजा विधि

    Updated: Sun, 03 May 2026 05:35 PM (GMT+05:30)

    ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 31 मई 2026 को मनाई जाएगी, जिसमें भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा का विधान है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान और दान करने से पाप ...और पढ़ें

    ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा के दिन क्या दान करें (AI Generated Image)

    ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा के दिन क्या दान करें (AI Generated Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि का अधिक महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही पवित्र नदी में स्नान और दान किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन शुभ कामों को करने से साधक को सभी पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही जीवन में आने वाले सभी संकट दूर होते हैं। ऐसे में आइए आपको बताते हैं कि कब मनाई जाएगी ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा।

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    (AI Generated Image)

    ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Jyeshtha Adhik Purnima 2026 Date and Shubh Muhurat)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 30 मई को सुबह 11 बजकर 57 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 31 मई को दोपहर 02 बजकर 14 मिनट पर होगा। ऐसे में ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 31 मई को मनाई जाएगी।
    ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा के दिन चन्द्रोदय का समय- रात 07 बजकर 36 मिनट पर

    ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 02 मिनट से 04 बजकर 43 मिनट तक
    विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 27 मिनट से 03 बजकर 37 मिनट तक
    गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 38 मिनट से 07 बजकर 01 मिनट तक
    निशिता मुहूर्त - शाम 07 बजकर 13 मिनट से 07 बजकर 33 मिनट तक

    सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

    सूर्योदय का समय- प्रातः 05 बजकर 24 मिनट पर
    सूर्यास्त का समय- सायं 07 बजकर 14 मिनट पर
    चंद्रोदय का समय- सायं 07 बजकर 36 मिनट पर
    चंद्रास्त का समय- चन्द्रास्त नहीं

    ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा पूजा विधि (Jyeshtha Adhik Purnima Puja Vidhi)

    • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े धारण करें।
    • मंदिर की सफाई कर गंगाजल से शुद्ध करें।
    • चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की मूर्ति को विराजमान करें।
    • धूप, दीप नैवेद्य और फूलमाला आदि अर्पित करें।
    • घी का दीपक जलाकर आरती करें।
    • कथा का पाठ करें।
    • विष्णु चालीसा और मंत्रों का जप करें।
    • फल और मिठई का भोग लगाएं।
    • मंदिर या गरीब लोगों में अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करें।

    इन बातों का रखें ध्यान

    • पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान करें।
    • किसी के वाद-विवाद न करें।
    • तामसिक भोजन का सेवन भूलकर भी न करें।
    • घर और मंदिर की साफ-सफाई का ध्यान रखें।

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।'

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