यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 08, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Kaal Sarp Dosh: जानिए क्या है कालसर्प दोष के लक्ष्ण और इससे छुटकारा पाने के वैदिक उपाय?
Kaal Sarp Dosh ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि जिस व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प दोष होता है उन्हें कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ब ...और पढ़ें

नई दिल्ली, अध्यात्म डेस्क | Kaal Sarp Dosh: ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि सभी राशि के जातकों की कुंडली में समय-समय पर ग्रहों की स्तिथि बदलती रहती है। जिससे कई प्रकार के योग का निर्माण होता है, जिसमें कुछ शुभ होते हैं और कुछ अशुभ माने जाते हैं। ग्रहों के अशुभ प्रभाव के कारण कुंडली में दोष का भी निर्माण होता है, जिसका प्रभाव जातक के जीवन पर नकारात्मक रूप से पड़ता है।
इन सभी में कालसर्प दोष को बहुत ही विनाशकारी माना जाता है। ज्योतिषविदों के अनुसार, जिस जातक कि कुंडली में कालसर्प दोष होता है, उन्हें आर्थिक, शारीरिक और मानसिक रूप से परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आइए ज्योतिषाचार्य मनोज थपलियाल जी से जानते हैं, क्या है कालसर्प दोष के लक्ष्ण और इससे जुड़े कुछ प्रभावशाली उपाय?
कुंडली में कब बनता है कालसर्प दोष?
ज्योतिषाचार्य मनोज थपलियाल बताते हैं कि कुंडली में राहु और केतु के अशुभ स्थिति के कारण कालसर्प दोष का निर्माण होता है। जब किसी जातक की कुंडली में मौजूद मुख्य ग्रह राहु और केतु के मध्य में आ जाते हैं, तब कालसर्प दोष लग जाता है। कुंडली में कालसर्प दोष के निर्माण से जातकों पर अन्य ग्रहों के द्वारा पड़ रहे शुभ प्रभाव कम हो जाते हैं और जातकों को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
कालसर्प दोष के लक्ष्ण क्या हैं?
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ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि कालसर्प दोष के निर्माण से जातक को एक ही समय पर शारीरिक, मानसिक और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
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इसके साथ कुंडली में इस दोष के निर्माण से संतान से जुड़े कष्टों का सामना करना पड़ता है और नौकरी के क्षेत्र में भी समस्याएं उत्पन्न हो सकती है।
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कालसर्प दोष का एक लक्ष्ण यह भी हैं कि जिन लोगों को सपने में मृत्यु या सांप अधिकांश समय दिखाई देते हैं, उनपर इस दोष का प्रभाव पड़ने का भय बढ़ जाता है।
कालसर्प दोष से बचने के लिए जरूर करें ये उपाय
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जिन जातकों की कुंडली में काल सर्प दोष होता है, उन्हें नियमित रूप से भगवान विष्णु की उपासना करना चाहिए और शनिवार के दिन बहते हुए जल में कोयले के टुकड़े प्रवाहित करना चाहिए। ऐसा करने से इस दोष का अशुभ प्रभाव कम हो जाता है।
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शास्त्रानुसार सावन मास में भगवान शिव को जल में मिला दूध अर्पित करना चाहिए और नितदिन कम से कम 3 माला महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से जातक को लाभ मिलता है।
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए शनिवार के दिन पीपल पेड़ की पूजा जरूर करनी चाहिए और इसके साथ इस वृक्ष की कम से कम 7 बार परिक्रमा करें। माना जाता है कि ऐसा करने से इस दोष का प्रभाव कम हो जाता है।
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