Mahashivratri 2026: कब और क्यों मनाया जाता है महाशिवरात्रि का त्योहार? यहां पढ़ें धार्मिक महत्व
महाशिवरात्रि का त्योहार भगवान शिव और महादेव की कृपा प्राप्त करने के लिए उत्तम माना जाता है। इस खास अवसर शिव पूजन करने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्य ...और पढ़ें

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि का धार्मिक महत्त्व (Image Source: AI-Generated)

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। माघ पूर्णिमा के बाद फाल्गुन की शुरुआत होती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, 2 फरवरी से फाल्गुन शुरू होगा। इस माह के आने का शिव भक्त बेसब्री से इंतजार करते हैं, क्योंकि फाल्गुन में महाशिवरात्रि का पर्व बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन शिव मंदिरों में खास रौनक देखने को मिलती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन शिव पूजन और व्रत करने से जीवन के सभी दुखों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। लेकिन क्या आप जानतें हैं कि आखिर महाशिवरात्रि (Mahashivratri 2026) क्यों मनाई जाती है। अगर नहीं पता, तो आइए हम आपको बताते हैं इसकी खास वजह के बारे में।
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क्यों मनाते हैं महाशिवरात्रि? (Why is Mahashivratri celebrated?)
पौराणिक कथा के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ था। मां पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए तपस्या की थी। उनकी तपस्या से मां पार्वती का विवाह महादेव के संग हुआ। इसलिए हर साल महाशिवरात्रि का पर्व बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है।
महाशिवरात्रि 2026 डेट और टाइम? (Mahashivratri 2026 Date and Shubh Muhurat)
वैदिक पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी (Kab Hai Mahashivratri 2026) को मनाया जाएगा।
फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत- 15 फरवरी को शाम 05 बजकर 34 मिनट पर
फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का समापन- 16 फरवरी को शाम 06 बजकर 04 मिनट पर
पूजा करने का शुभ मुहूर्त- शाम 05 बजकर 54 मिनट से लेकर रात 09 बजकर 03 मिनट तक
मध्य पूजा का शुभ मुहूर्त- 09 बजकर 03 मिनट से लेकर देर रात 12 बजकर 12 मिनट तक है।
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इन बातों का रखें ध्यान
- महाशिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
- साफ कपड़ें धारण करें और सूर्य देव को अर्घ्य दें।
- विधिपूर्वक दूध, दही, घी, शहद और शक्कर समेत आदि चीजों से अभिषेक करें।
- शिवलिंग पर 11 या 21 बिल्वपत्र अर्पित करें
- व्रत का संकल्प लें।
- पूजा के दौरान मंत्रों का जप और शिव चालीसा का पाठ करें।
- व्रत कथा का पाठ करें।
- मंदिर या गरीब लोगों में अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करें।
- मंदिर की सफाई का विशेष ध्यान रखें।
- किसी से वाद-विवाद न करें।
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।