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    Kalashtami 2026: कालाष्टमी पर करें भगवान शिव की खास पूजा, नहीं परेशान करेंगे शत्रु

    Updated: Thu, 08 Jan 2026 09:20 AM (IST)

    हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है। यह पर्व भगवान शिव के रौद्र अवतार काल भैरव को समर्पित है। ...और पढ़ें

    Kalashtami 2026: कालाष्टमी पर करें ये काम।

    Kalashtami 2026: कालाष्टमी पर करें ये काम।

    HighLights

    1. हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का पर्व मनाया जाता है

    2. साल 2026 की पहली कालाष्टमी 10 जनवरी को मनाई जाएगी

    3. काल भैरव को काशी का कोतवाल भी कहा जाता है

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। यह दिन भगवान शिव के सबसे रौद्र और शक्तिशाली अवतार भगवान काल भैरव को समर्पित है। साल 2026 की पहली कालाष्टमी (Kalashtami 2026) 10 जनवरी को मनाई जाएगी। काल भैरव को 'काशी का कोतवाल' और 'संकटमोचन' के रूप में पूजा जाता है।

    ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति कालाष्टमी के दिन पूरी श्रद्धा से काल भैरव की पूजा करता है और शिव जी के 108 नामों का जप करता है, उसे जीवन में कभी भी अकाल मृत्यु भय व शत्रुओं का सामना नहीं करना पड़ता है। आइए भोलेबाबा के शक्तिशाली नामों का जप करते हैं, जो इस प्रकार हैं -

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    ।।भगवान शिव के 108 नाम।।

    ॐ महाकाल नमः

    ॐ रुद्रनाथ नमः

    ॐ भीमशंकर नमः

    ॐ नटराज नमः

    ॐ प्रलेयन्कार नमः

    ॐ चंद्रमोली नमः

    ॐ डमरूधारी नमः

    ॐ चंद्रधारी नमः

    ॐ भोलेनाथ नमः

    ॐ कैलाश पति नमः

    ॐ भूतनाथ नमः

    ॐ नंदराज नमः

    ॐ नन्दी की सवारी नमः

    ॐ ज्योतिलिंग नमः

    ॐ मलिकार्जुन नमः

    ॐ भीमेश्वर नमः

    ॐ विषधारी नमः

    ॐ बम भोले नमः

    ॐ विश्वनाथ नमः

    ॐ अनादिदेव नमः

    ॐ उमापति नमः

    ॐ गोरापति नमः

    ॐ गणपिता नमः

    ॐ ओंकार स्वामी नमः

    ॐ ओंकारेश्वर नमः

    ॐ शंकर त्रिशूलधारी नमः

    ॐ भोले बाबा नमः

    ॐ शिवजी नमः

    ॐ शम्भु नमः

    ॐ नीलकंठ नमः

    ॐ महाकालेश्वर नमः

    ॐ त्रिपुरारी नमः

    ॐ त्रिलोकनाथ नमः

    ॐ त्रिनेत्रधारी नमः

    ॐ बर्फानी बाबा नमः

    ॐ लंकेश्वर नमः

    ॐ अमरनाथ नमः

    ॐ केदारनाथ नमः

    ॐ मंगलेश्वर नमः

    ॐ अर्धनारीश्वर नमः

    ॐ नागार्जुन नमः

    ॐ जटाधारी नमः

    ॐ नीलेश्वर नमः

    ॐ जगतपिता नमः

    ॐ मृत्युन्जन नमः

    ॐ नागधारी नमः

    ॐ रामेश्वर नमः

    ॐ गलसर्पमाला नमः

    ॐ दीनानाथ नमः

    ॐ सोमनाथ नमः

    ॐ जोगी नमः

    ॐ भंडारी बाबा नमः

    ॐ बमलेहरी नमः

    ॐ गोरीशंकर नमः

    ॐ शिवाकांत नमः

    ॐ महेश्वराए नमः

    ॐ महेश नमः

    ॐ संकटहारी नमः

    ॐ महेश्वर नमः

    ॐ रुंडमालाधारी नमः

    ॐ जगपालनकर्ता नमः

    ॐ पशुपति नमः

    ॐ संगमेश्वर नमः

    ॐ दक्षेश्वर नमः

    ॐ घ्रेनश्वर नमः

    ॐ मणिमहेश नमः

    ॐ अनादी नमः

    ॐ अमर नमः

    ॐ आशुतोष महाराज नमः

    ॐ विलवकेश्वर नमः

    ॐ अचलेश्वर नमः

    ॐ ओलोकानाथ नमः

    ॐ आदिनाथ नमः

    ॐ देवदेवेश्वर नमः

    ॐ प्राणनाथ नमः

    ॐ शिवम् नमः

    ॐ महादानी नमः

    ॐ शिवदानी नमः

    ॐ अभयंकर नमः

    ॐ पातालेश्वर नमः

    ॐ धूधेश्वर नमः

    ॐ सर्पधारी नमः

    ॐ त्रिलोकिनरेश नमः

    ॐ हठ योगी नमः

    ॐ विश्लेश्वर नमः

    ॐ नागाधिराज नमः

    ॐ सर्वेश्वर नमः

    ॐ उमाकांत नमः

    ॐ बाबा चंद्रेश्वर नमः

    ॐ त्रिकालदर्शी नमः

    ॐ त्रिलोकी स्वामी नमः

    ॐ महादेव नमः

    ॐ गढ़शंकर नमः

    ॐ मुक्तेश्वर नमः

    ॐ नटेषर नमः

    ॐ गिरजापति नमः

    ॐ भद्रेश्वर नमः

    ॐ त्रिपुनाशक नमः

    ॐ निर्जेश्वर नमः

    ॐ किरातेश्वर नमः

    ॐ जागेश्वर नमः

    ॐ अबधूतपति नमः

    ॐ भीलपति नमः

    ॐ जितनाथ नमः

    ॐ वृषेश्वर नमः

    ॐ भूतेश्वर नमः

    ॐ बैजूनाथ नमः

    ॐ नागेश्वर नमः।।

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