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    Kalashtami 2026: कालाष्टमी पर शिववास योग का महासंयोग, नोट करें वह 'गोल्डन मिनट' जब मांगी हर दुआ होगी पूरी

    Updated: Thu, 05 Feb 2026 09:00 PM (IST)

    फाल्गुन माह की कालाष्टमी 9 फरवरी को मनाई जाएगी। इस दिन काल भैरव देव की विशेष पूजा और व्रत किया जाता है, जिससे सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और संकटों स ...और पढ़ें

    Kalashtami 2026: कालाष्टमी का धार्मिक महत्व

    Kalashtami 2026: कालाष्टमी का धार्मिक महत्व

    HighLights

    1. कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि काल भैरव देव को समर्पित है।

    2. इस दिन काल भैरव देव की पूजा और भक्ति की जाती है।

    3. काल भैरव देव की पूजा से सभी संकटों का नाश होता है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, सोमवार 09 फरवरी को फाल्गुन माह की कालाष्टमी है। यह पर्व हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर काल भैरव देव की विशेष पूजा की जाती है। साथ ही काल भैरव देव के निमित्त व्रत रखा जाता है। इस व्रत को करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिल जाती है।

    Bhagwan Shiv

    ज्योतिषियों की मानें तो फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर दुर्लभ शिववास योग का संयोग बन रहा है। साथ ही कई अन्य मंगलकारी योग बन रहे हैं। इन योग में काल भैरव देव की पूजा करने से साधक को मनचाहा वरदान (Kaal Bhairav Puja Benefits) मिलेगा। आइए, कालाष्टमी का शुभ मुहूर्त और योग जानते हैं-

    कालाष्टमी शुभ मुहूर्त (Masik Kalashtami Rituals)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि सोमवार 09 फरवरी को सुबह 05 बजकर 01 मिनट पर शुरू होगी और 10 फरवरी को सुबह 07 बजकर 27 मिनट पर समाप्त होगी। कालाष्टमी पर निशा काल में काल भैरव देव की पूजा की जाती है। अत: 09 फरवरी को फाल्गुन माह की कालाष्टमी मनाई जाएगी।

    शिव योग (Shiv Yoga)

    ज्योतिषियों की मानें तो फाल्गुन माह की कालाष्टमी पर दुर्लभ शिववास योग (Vridhi Yoga Significance) का निर्माण हो रहा है। इस योग में भगवान शिव कैलाश पर जगत जननी मां पार्वती के साथ रहेंगे। शिववास योग में काल भैरव देव की पूजा करने से साधक को दोगुना फल मिलेगा। साथ ही सभी अटके काम पूरे होंगे। इसके साथ ही कालाष्टमी पर वृद्धि योग का भी संयोग है। इन योग में काल भैरव देव की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होगी।

    खबरें और भी

    पंचांग

    सूर्योदय - सुबह 07 बजकर 04 मिनट पर

    सूर्यास्त - शाम 06 बजकर 07 मिनट पर

    ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 05 बजकर 21 मिनट से 06 बजकर 12 मिनट तक

    विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 26 मिनट से 03 बजकर 10 मिनट तक

    गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 04 मिनट से 06 बजकर 30 मिनट तक

    निशिता मुहूर्त - रात्रि 12 बजकर 09 मिनट से 01 बजकर 01 मिनट तक

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।