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    कन्नप्पा ने क्यों शिवलिंग पर रखा था पैर? पढ़ें भोलेनाथ को आंखें दान करने वाले भक्त की कहानी

    Updated: Sat, 18 Apr 2026 12:30 PM (IST)

    कन्नप्पा की कहानी निस्वार्थ भक्ति और चरम समर्पण का सर्वोच्च उदाहरण है, जो यह संदेश देती है कि ईश्वर केवल भाव और निश्छल प्रेम को देखते हैं, न कि औपचारि ...और पढ़ें

    शिव भक्त कन्नप्पा की अद्भुत कहानी (Picture Credit- AI Generated)

    शिव भक्त कन्नप्पा की अद्भुत कहानी (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. कन्नप्पा को पूजा-पाठ करने का नहीं था ज्ञान

    2. शिवलिंग पर अर्पित की अपनी आंखें

    3. कन्नप्पा की निस्वार्थ भक्ति से प्रसन्न हुए महादेव

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कन्नप्पा नयनार दक्षिण भारत के 63 नयनार संतों में से एक थे, जिनका जन्म एक शिकारी समुदाय में हुआ था। इन्हें कन्नप्पा नयनार या थिण्णन के नाम से भी जाना जाता है। थिण्णन को पूजा के तौर-तरीकों का कोई ज्ञान नहीं था, लेकिन उनके मन में भगवान शिव के प्रति अपार प्रेम और भक्ति थी। यही कारण है कि कन्नप्पा की पूजा पद्धति पारंपरिक शास्त्रों के विपरीत होने के बाद भी उन्हें महादेव का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। चलिए पढ़ते हैं इस अद्भुत कथा के बारे में।

    कन्नप्पा की आराधना के अनोखे तरीके

    श्रीकालहस्ती मंदिर से जुड़ी कथा के अनुसार, एक बार कन्नप्पा को जंगल में घूमते-घूमते एक अत्यंत ही प्राचीन मंदिर दिखा, जिसमें एक दिव्य शिवलिंग स्थापित था। उन्होंने उस शिवलिंग को ही अपने आराध्य के रूप में स्वीकार कर लिया। कन्नप्पा शिवलिंग को वही अर्पण करते थे, जो उनके पास सबसे अच्छा होता था, चाहे फिर वह शिकार किया हुआ ताजा मांस ही क्यों न हो।

    जल अर्पित करने के लिए, वह नदी से मुंह में भरकर लाते थे और उसी से महादेव का अभिषेक कर देते थे। जब उन्होंने देखा कि शिवलिंग पर कुछ सूखे पत्ते टूट कर गिर गए हैं, तो उन्होंने अपने पैर से शिवलिंग से पत्ते हटा दिए।

    दिया ये बलिदान

    एक बार भगवान शिव ने कन्नप्पा की भक्ति की परीक्षा लेनी चाही। कन्नप्पा ने देखा कि शिवलिंग की एक आंख से खून बह रहा है, तब उन्होंने बिना किसी संकोच के तीर से अपनी एक आंख निकाली और शिवलिंग पर लगा दी। इससे एक आंख का खून रुक गया। लेकिन दूसरी आंख से खून बहने लगा, तो उन्होंने अपनी दूसरी आंख भी निकालने का फैसला किया।

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    kannappa ai

    (Picture Credit- AI Generated)

    लेकिन फिर उनके मन में यह विचार आया कि अगर व अपनी दूसरी आंख भी निकाल देंगे, तो सही स्थान पर नेत्र कैसे लगा पाएंगे। ये सोचकर उन्होंने अपने पैर का अंगूठा शिवलिंग के दूसरे नेत्र पर रखा, ताकि शिवलिंग के सही स्थान पर नेत्र लगा पाएं। फिर जैसे ही उन्होंने अपने बाण से अपना नेत्र निकालने का प्रयास किया, तो महादेव स्वयं प्रकट हो गए और कन्नप्पा का हाथ पकड़ लिया। महादेव ने उनके दोनों नेत्र ठीक कर दिए।

    इसलिए पड़ा कन्नप्पा नाम

    कन्नप्पा में कन्न का अर्थ है आंख और अप्पा का अर्थ है पिता या दाता। वर्तमान में आंध्रप्रदेश के तिरुपति जिले के कालहस्ती नामक जगह पर महादेव का मंदिर स्थापित है, जिसे लेकर यह मान्यता है कि यह वही स्थान है, जहां भक्तराज कन्नप्पा ने शिवलिंग पर अपने नेत्र अर्पित किए थे। इस मंदिर को श्रीकालहस्ती महादेव के नाम से जाना जाता है।

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।