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    प्राचीन परंपरा या मॉडर्न ट्रेंड? लड़कों के कान छिदवाने पर क्या कहते हैं हमारे पूर्वज और शास्त्र

    Updated: Fri, 24 Apr 2026 02:30 PM (IST)

    लड़कों का कान छिदवाना आजकल एक ट्रेंड बन गया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह हमारे 16 संस्कारों में से एक है? आइए यहां कर्णवेध संस्कार के महत्व को यह ...और पढ़ें

    Karnavedha Sanskar Benefits: लड़कों का कान छिदवाना क्यों है जरूरी? (Ai Generated Image)

    Karnavedha Sanskar Benefits: लड़कों का कान छिदवाना क्यों है जरूरी? (Ai Generated Image)

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    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज के समय में लड़कों का कान छिदवाना और बाली पहनना ट्रेंड माना जाता है। लोग इसे फैशन के तौर पर अपनाते हैं। लेकिन भारतीय संस्कृति में यह केवल शृंगार या आधुनिक फैशन नहीं है, बल्कि एक बहुत महत्वपूर्ण कर्णवेध संस्कार है। हमारे पूर्वजों ने इसे 16 संस्कारों में शामिल किया था, जिसके पीछे गहरे धार्मिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक कारण छिपे हैं। आइए यहां जानते हैं।

    karnavedha sanskar significance 1

    Ai Generated Image

    कर्णवेध संस्कार का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व

    शास्त्रों के अनुसार, मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक 16 संस्कार बताए गए हैं, जिनमें से कर्णवेध यानी कान छिदवाना नौवां संस्कार है। इसका पालन सदियो पहले से किया जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र की मानें तो कान छिदवाने से राहु और केतु जैसे छाया ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं। कान का निचला हिस्सा सीधे तौर पर मस्तिष्क और सुनने की क्षमता से जुड़ा होता है। धार्मिक मान्यता है कि कान छिदवाने से जातक की आयु और बुद्धि में वृद्धि होती है। यही वजह है कि पुराने समय में लड़कों के कान जरूर छिदवाए जाते थे।

    फायदे

    • कान के निचले हिस्से में एक ऐसा प्वाइंट होता है, जिसका सीधा संबंध आंखों की नसों से होता है। कान छिदवाने से इस पर दबाव पड़ता है, जिससे आंखों की रोशनी तेज होती है।
    • कान छिदवाने से मस्तिष्क के बाएं और दाएं हिस्से के बीच ऊर्जा का संचार बढ़ता है। इससे लड़कों की याददाश्त और एकाग्रता में सुधार होता है।
    • इससे ऐसी नसें भी जुड़ी होती हैं, जिन्हें सक्रिय करने से भूख बढ़ती है और पाचन तंत्र अच्छा रहता है।

    कब और कैसे करवाएं?

    शास्त्रों के अनुसार, लड़कों का कर्णवेध संस्कार विषम सालों कि जैसे 3, 5, या 7 की उम्र में करना शुभ माना जाता है। लड़कों का हमेशा पहले दायां कान छिदवाया जाता है, जबकि लड़कियों का बायां।

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा अंधविश्वास के खिलाफ है।

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