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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 18, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Kartik Month 2024: कार्तिक माह में जरूर करें तुलसी से जुड़े ये दो उपाय, चमक जाएगी किस्मत

    Updated: Fri, 18 Oct 2024 10:02 AM (IST)

    हिन्दू कैलेण्डर का आठवां महीना कार्तिक मास होता है। यह माह मुख्य रूप से प्रभु श्रीहरि की उपासना के लिए समर्पित माना जाता है। इसी के साथ इस माह में तुल ...और पढ़ें

    Kartik Month 2024 कार्तिक माह में जरूर करें तुलसी से जुड़े ये दो उपाय।
    Kartik Month 2024 कार्तिक माह में जरूर करें तुलसी से जुड़े ये दो उपाय।

    HighLights

    1. हिन्दू कैलेण्डर का आठवां महीना है कार्तिक माह।
    2. भगवान विष्णु और तुलसी की होती है पूजा।
    3. शुक्रवार, 18 अक्टूबर से शुरू हो चुका है कार्तिक मास।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में तुलसी को विशेष महत्व दिया जाता है। ऐसी मान्यता है कि रोजाना तुलसी की पूजा करने व उसमें जल देने से साधक पर मां लक्ष्मी की भी कृपा बनी रहती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक का महीना (Kartik month 2024) आज यानी 18 अक्टूबर से शुरू हो चुका है। ऐसे में आप इस माह में तुलसी के साथ-साथ भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति के लिए ये उपाय कर सकते हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं इस माह के लिए तुलसी से जुड़े कुछ उपाय।

    रोजाना करें ये काम

    कार्तिक माह में रोजाना सुबह-शाम तुलसी की पूजा जरूर करनी चाहिए और जल भी जरूर देना चाहिए। वहीं शाम के समय तुलसी के समक्ष घी का दीपक भी जरूर जलाएं। बस इस बात का ध्यान रखें कि रविवार और एकादशी के दिन तुलसी में जल न दें और न ही तुलसी के पत्ते उतारें। क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इस दिनों पर मां तुलसी, विष्णु जी के निमित्त व्रत करती हैं, तो इन कार्यों को करने से उनके व्रत में व्यवधान उत्पन्न हो सकता है।

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    भगवान विष्णु होंगे प्रसन्न

    हिंदू धर्म में कार्तिक माह को भगवान विष्णु और तुलसी दोनों की ही पूजा-अर्चना के लिए उत्तम माना गया है। वहीं विष्णु जी की पूजा में भी तुलसी अर्पित करना भी काफी शुभ होता है। इसलिए इस माह में विष्णु जी की पूजा के दौरान उन्हें तुलसी दल जरूर अर्पित करें। साथ ही विष्णु जी के भोग में तुलसी का पत्ता जरूर डालें, क्योंकि इसके बिना उनका भोग अधूरा माना जाता है।

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    करें इन मंत्रों का जप

    कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नम:

    महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी, आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते

    गायत्री मंत्री - ॐ भूर्भुवः स्वः

    तत्सवितुर्वरेण्यं

    भर्गो देवस्यः धीमहि

    धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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