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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 01, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    पूजा के बाद विधि-विधान से बंद किए गए केदारनाथ के कपाट

    By Preeti jhaEdited By:
    Updated: Tue, 01 Nov 2016 11:16 AM (IST)

    केदारनाथधाम के कपाट मंगलवार सुबह 8 बजकर 28 मिनट पर पूजा अर्चना के बाद विधि विधान से बंद कर दिए गए। मंदिर को पांच कुंतल फूलों से सजाया गया है ...और पढ़ें

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    रुद्रप्रयाग। रुद्रप्रयाग जनपद स्थित केदारनाथ धाम के कपाट मंगलवार की सुबह 8 बजकर 28 मिनट पर पूजा अर्चना के बाद विधि विधान से बंद कर दिए गए। मंदिर को पांच कुंतल फूलों से सजाया गया है। कपाट बंद होने के साथ ही भोले बाबा की चल विग्रह डोली ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर के लिए रवाना हो गई। शीतकाल में आगामी छह माह तक बाबा भोले की पूजा ऊखीमठ में ही होगी।
    सुबह करीब पांच बजे से वेदपाठियों, हक हकूकधारियों, पुजारियों की उपस्थिति मंदिर में विशेष पूजा शुरू की गई। गर्भगृह में पूजा के बाद पंचमुखी मूर्ति को उत्सव डोली में रखा गया। इसके बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए।
    कपाट बंदी के दौरान सेना के बैंड की धुन और श्रद्धालुओं के जयकारे से केदारपूरी गुंजायमान हो उठी। डोली को मंदिर की परिक्रमा कराई गई। मुख्यमंत्री हरीश रावत भी डोली पर कंधा लगाकर करीब सौ मीटर दूर तक चले। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री उमा भारती, सांसद रमेश पोखरियाल निशंक, मंदिर के पुजारी शिवशंकर लिंग समेत 300 से अधिक श्रद्धालु मौजूद थे।
    बाबा की उत्सव डोली आज शाम रामपुर पहुंचेगी। कल गुप्तकाशी मंदिर में विश्राम करेगी। इसके बाद तीन नवंबर को ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में इसे विराजमान किया जाएगा। वहीं बाबा भोले की आगामी छह माह तक पूजा होगी।
    वहीं, उत्तरकाशी जनपद में स्थित यमुनोत्री धाम के कपाट मंगलवार की दोपहर को बंद होंगे। गंगोत्री धाम के कपाट सोमवार को बंद हो चुके हैं, जबकि आगामी 16 नवंबर को बदरीनाथ के कपाट बंद होंगे।