विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

केदारनाथ से पहले पशुपतिनाथ और रामेश्वरम से पहले गंगोत्री? जानिए तीर्थ यात्राओं से जुड़ी इन मान्यताओं की सच्चाई

Published: Fri, 12 Jun 2026 02:00 PM (IST)

भारत में कई तीर्थ स्थलों से जुड़ी ऐसी मान्यताएं हैं कि कुछ विशेष मंदिरों के दर्शन के बिना यात्रा अधूरी ...और पढ़ें

केदारनाथ से पहले पशुपतिनाथ जाना क्यों जरूरी? (AI-Generated Image)

केदारनाथ से पहले पशुपतिनाथ जाना क्यों जरूरी? (AI-Generated Image)

HighLights

  1. केदारनाथ यात्रा पशुपतिनाथ दर्शन बिना अधूरी मानी जाती है।

  2. रामेश्वरम में गंगाजल से अभिषेक का विशेष महत्व है।

  3. ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दो स्वरूप हैं।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत में कई ऐसे तीर्थ स्थल हैं, जिनको लेकर ऐसी कई परंपराएं प्रचलित हैं कि किसी खास धाम की यात्रा से पहले किसी अन्य मंदिर या तीर्थ के दर्शन करना शुभ माना जाता है।

हालांकि इनमें से ज्यादातर मान्यताएं स्थानीय परंपराओं, पुराणों और भक्तों की आस्था पर आधारित हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ प्रसिद्ध मान्यताओं के बारे में।

केदारानाथ बाबा

केदारनाथ जाने से पहले पशुपतिनाथ क्यों?

गवान शिव को समर्पित पशुपतिनाथ मंदिर नेपाल की राजधानी काठमांडू में स्थित है, जबकि केदारनाथ उत्तराखंड भारत में है। इसके बाद भी पशुपतिनाथ और केदारनाथ मंदिर के बीच खास पौराणिक और आध्यात्मिक संबंध है।

ऐसी मान्यता है कि, केदारनाथ में भगवान शिव का शरीर और पशुपतिनाथ में उनके मुख का दर्शन होता है। इसलिए जब तक भक्त पशुपतिनाथ के दर्शन नहीं करता, तब तक उसकी केदारनाथ की यात्रा अधूरी मानी जाती है।

रामेश्वरम मंदिर

रामेश्वरम से पहले गंगोत्री का जल क्यों?

दक्षिण भारत में स्थित रामेश्वर मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करने की परंपरा सदियों पुरानी है। इसी वजह से कई श्रद्धालु पहले गंगोत्री या गंगा तट से जल लेकर रामेश्वर पहुंचते हैं।

आज भी रामनाथस्वामी मंदिर में गंगाजल से अभिषेक करने का खास महत्व है। तीर्थ पुरोहित के मुताबिक, रामेश्वरम में गौरीकुंड के बाद गंगाजल जल शिवलिंग पर नहीं चढ़ाया जाता है। जो लोग रामेश्वरम में गंगा जल लेकर जाते हैं वह गौरीकुंड से पहले ही भर लेते हैं।

ओमकारममलेश्वर

ओंकारेश्वर और ममलेश्वर का संबंध

मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में स्थित ओंकारेश्वर और ममलेश्वर मंदिर ज्योतिर्लिंग के ही दो स्वरूप है। ओंकारेश्वर लिंग मनुष्य द्वारा निर्मित नहीं, बल्कि खुद प्रकृति ने इसका निर्माण किया है। इसके चारों ओर हमेशा पानी भरा रहता है।

जबकि ममलेश्वर मंदिर नर्मदा के दक्षिण तट पर ओंकारेश्वर से थोड़ी दूरी पर है। द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में ओंकारममलेश्वरम का उल्लेख देखने को मिलता है, जिस आधार पर कई श्रद्धालु दोनों मंदिरों के दर्शन को ही पूरी यात्रा मानते हैं।

वैद्यनाथ और बैजनाथ को लेकर क्या है मान्यता?

झारखंड के देवघर में स्थित बाबा वैद्यनाथ ज्योतिर्लंग प्रमुख 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इस पवित्र धाम का जुड़ाव रावण से भी जोड़ा जाता है। वैद्यनाथ धाम में भगवान शिव के साथ शक्ति भी वास करती हैं।

51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ वैद्यनाथ धाम में भी है, जहां माता सती का हृदय गिरा था। यहां आने वाले वैद्यनाथ मंदिर के अलावा मां शक्ति के भी दर्शन करते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि, ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ दोनों के दर्शन करने से ही बाबा धाम की यात्रा सिद्ध मानी जाती है।

तीर्थ यात्रा के बाद क्या करना चाहिए?

धर्मशास्त्रों और लोकपरंपराओं के अनुसार, तीर्थयात्रा के बाद दान, पूजा, जप-तप, भजन और कीर्तन करना चाहिए। इसके अलावा ब्राह्मण भोजन और सामूहिक रूप से प्रसाद का वितरण भी करने की भी परंपरा है।

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।