Krishna Shashti 2025: कब मनाई जाएगी कृष्ण षष्ठी, जानिए इस दिन क्यों बनते हैं कढ़ी चावल
हर साल भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी पर जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इसके 6 दिन बार कृष्ण षष्ठी या कृष्ण छठी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन पर कढ़ी चा ...और पढ़ें

HighLights
- जन्माष्टमी के 6 दिन बाद मनाई जाती है कृष्ण षष्ठी।
- इस दिन होती है लड्डू गोपाल की पूजा-अर्चना।
- कान्हा जी को लगाया जाता है कढ़ी चावल का भोग।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में बच्चे के जन्म के 6 दिन बाद छठी मनाई या पूजी जाती है। इसी प्रकार जन्माष्टमी के पर्व के बाद भगवान श्रीकृष्ण की भी छठी (Krishna Shashti 2025 date) मनाई जाती है। जन्माष्टमी की तरह ही कृष्ण षष्ठी का पर्व भी काफी उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन पर लड्डू गोपाल जी की पूजा की जाती है और उन्हें नए वस्त्र पहनाएं जाते हैं।
कब है कृष्ण छठी
जिन लोगों ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 15 अगस्त को मनाया था, वह लोग भगवान श्रीकृष्ण की छठी 21 अगस्त 2025 को मना सकते हैं। वहीं जिन लोगों ने जन्माष्टमी का व्रत 16 अगस्त को किया था। वह कृष्ण छठी 22 अगस्त को मनाएंगे।
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इस दिन क्यों बनता है कढ़ी चावल
भगवान कृष्ण को मक्खन और दही के साथ-साथ कढ़ी काफी प्रिय मानी गई है। यही कारण है कि कृष्ण षष्ठी पर कढ़ी चावल बनाए जाते हैं। दूसरा कारण यह भी है कि दही और बेसन सात्विक भोजन की श्रेणी में आते हैं और यह भोजन पौष्टिक होने के साथ-साथ सुपाच्य भी है। इन्ही कारणों से कृष्ण षष्ठी पर कढ़ी चावल बनाने की परंपरा चली आ रही है।
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कान्हा जी की पूजा विधि
सबसे पहले लड्डू गोपाल को पंचामृत से स्नान कराएं। अब साधारण जल से स्नान करवाने के बाद लड्डू गोपाल को नए वस्त्र पहनाएं। इसके बाद लड्डू गोपाल को नए आभूषण और पगड़ी पहनाएं व बांसुरी अर्पित करें। कान्हा जी को चंदन का तिलक लगाएं।
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लड्डू गोपाल जी की आंखों में काजल लगाएं। यह काजल घर पर ही तैयार करना ज्यादा शुभ माना जाता है। इस दिन मंगल गीत गाए जाते हैं और लड्डू गोपाल को झूला झुलाया जाता है। अंत में कान्हा जी की आरती करें और सभी लोगों में प्रसाद बांटें।
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