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    Janmashtami पर खीरे के बिना अधूरी है कान्हा जी की पूजा, जानिए पूरी विधि

    Updated: Tue, 12 Aug 2025 06:00 PM (IST)

    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी वह पावन पर्व है जब अवतार श्रीकृष्ण का भव्य जन्म होता है। यह दिन अंधकार से प्रकाश की ओर दुःख से आनंद की ओर और अज्ञान से ज्ञान की ओ ...और पढ़ें

    Janmashtami cucumber ritual क्या है जन्माष्टमी पर खीरे का महत्व?
    Janmashtami cucumber ritual क्या है जन्माष्टमी पर खीरे का महत्व?

    दिव्या गौतम, एस्ट्रोपत्री। जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर भक्तजन पूरे मन और श्रद्धा से इस दिव्य अवसर को मनाते हैं, जिसमें भगवान की बाल लीलाओं और उनके जन्म की पावन कथा का स्मरण किया जाता है।

    जन्माष्टमी (Janmashtami 2025) पावन दिन की एक अहम परंपरा है खीरे से लड्डू गोपाल का जन्म जो भगवान के जन्म की कोख से जन्म लेने की घटना का प्रतीक है। जैसे माता के गर्भ से बच्चे का जन्म होता है और नाल छेदन कर उसे संसार में लाया जाता है, उसी प्रकार जन्माष्टमी की रात खीरे को काटकर लड्डू गोपाल का जन्म करवाया जाता है।

    कैसे होती है ये प्रक्रिया (Janmashtami 2025 Puja Vidhi)

    जन्माष्टमी के दिन सुबह-सुबह डंठल वाला ताजा खीरा लिया जाता है और उसमें भगवान लड्डू गोपाल को रखा जाता है। जैसे ही आधी रात के 12 बजे का समय होता है, उस खीरे को सिक्के की मदद से सावधानीपूर्वक काटा जाता है और उसमें से लड्डू गोपाल को निकाला जाता है। इस प्रक्रिया को कई राज्यों में "नाल छेदन" के नाम से जाना जाता है।

    इसके बाद भगवान कृष्ण की आरती की जाती है और भक्तों में प्रसाद के रूप में खीरे का वितरण किया जाता है। खीरे को श्रीकृष्ण को अर्पित करने के बाद कुछ समय में भक्तों के बीच बांट दिया जाता है। यह परंपरा भगवान कृष्ण के जन्म की याद दिलाती है और उनके प्रति श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है।

    (Picture Credit: Freepik) (AI Image)

    कब और कैसे मनाई जाएगी जन्माष्टमी?

    15 अगस्त 2025 (स्मार्त सम्प्रदाय)

    • विशेष योग - वृद्धि योग 16 अगस्त को प्रातः 10 बजकर 18 मिनट से प्रातः 07 बजकर 21 मिनट तक
    • नक्षत्र - भरणी नक्षत्र प्रातः 06 बजकर 06 मिनट तक, फिर कृतिका नक्षत्र ।
    • रात्रि पूजा का समय - 16 अगस्त को रात 12 बजकर 04 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक।

    16 अगस्त 2025 (वैष्णव सम्प्रदाय)

    • विशेष योग - ध्रुव योग प्रातः 04 बजकर 28 मिनट तक।
    • नक्षत्र - कृतिका नक्षत्र प्रातः 04 बजकर 38 मिनट तक, फिर रोहिणी नक्षत्र- रात्रि 03 बजकर 17 मिनट तक।
    • रात्रि पूजा का समय - 17 अगस्त, रात 12 बजकर 04 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक।

    लेखक: दिव्या गौतम, Astropatri.com अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए hello@astropatri.com पर संपर्क करें।

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