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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 16, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    तुलसी और भगवान गणेश ने एक-दूसरे को क्यों दिया था श्राप, मिलती है ये कथा

    Updated: Wed, 16 Oct 2024 03:29 PM (IST)

    तुलसी को हिंदू धर्म में विशेष महत्व दिया गया है और पूजनीय भी माना गया है। लेकिन गणेश जी पूजा में कभी भी तुलसी का उपयोग नहीं किया जाता। गणेश जी को तुलस ...और पढ़ें

    तुलसी और गणेश जी ने एक दूसरे को क्यों दिया श्राप
    तुलसी और गणेश जी ने एक दूसरे को क्यों दिया श्राप

    HighLights

    1. भगवान गणेश को कहा जाता है प्रथम पूज्य देव।
    2. गणेश जी की पूजा में नहीं होता तुलसी का उपयोग।
    3. तुलसी ने क्रोध में आकर गणेश जी को दिया था श्राप।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, गणेश जी को प्रथम पूज्य देव कहा जाता है, क्योंकि किसी भी कार्य की शुरुआत से पहले उनकी पूजा की जाती है। लेकिन उनकी पूजा में पवित्र मानी गई तुलसी का उपयोग नहीं किया जाता। चलिए जानते हैं कि तुलसी और गणेश जी ने एक-दूसरे को क्यों और क्या श्राप दिया था।

    तुलसी ने रखा विवाह का प्रस्ताव

    पौराणिक कथा के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि तुलसी माता, गणेश जी से प्रेम करती थी और उनसे विवाह करना चाहती थी। एक बार अपनी यह इच्छा लेकर वह गणेश जी के पास पहुंची और उनसे अपने मन की बात कही। लेकिन गणेश जी ने उनके शादी के प्रस्ताव को मना कर दिया। इससे तुलसी माता बहुत क्रोधित हो गई और उन्होंने गणेश जी को श्राप दिया कि तुम्हारी दो शादियां होंगी। इसी श्राप के फलस्वरुप गणेश जी का विवाह रिद्धि और सिद्धि नामक दो बहनों से हुआ।

    गणेश जी ने भी दिया श्राप

    तुलसी के श्राप देने के कारण गणेश जी भी क्रोधित हो गए और उन्होंने भी तुलसी को श्राप दे दिया। श्राप देते हुए गणेश जी ने कहा कि तुम्हारा विवाह एक राक्षस से होगा। इसी श्राप के चलते तुलसी का विवाह राक्षस कुल में दानव राज जलंधर से हुआ।

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    इसलिए नहीं चढ़ाते तुलसी

    गणेश जी के श्राप देने के बाद तुलसी को अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्होंने गणेश जी से क्षमा याचना की। तब गणेश जी ने कहा कि कालांतर में तुम एक पौधे का रूप धारण कर लोगी और तुम्हारी पूजा की जाएगी. लेकिन मेरी पूजा में तुम्हारा उपयोग नहीं किया जाएगा। साथ ही यह भी माना जाता है कि तुलसी और गणेश जी के बीच बैर भाव है। इसलिए गणेश जी की पूजा में तुलसी का इस्तेमाल नहीं किया जाता।

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