जब देवताओं को बचाने के लिए महादेव बने 5 साल के बालक, पढ़ें 'बटुक भैरव' की पौराणिक कथा
बटुक भैरव भगवान शिव का एक सौम्य बाल स्वरूप हैं, जिनकी पूजा से भय, संकट और शत्रु बाधाओं से मुक्ति मिलती है। ...और पढ़ें

भगवान शिव के बाल अवतार बटुक भैरव की उत्पत्ति से जुड़ी कथा (Picture Credits- AI Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भगवान शिव से जुड़े अनेक स्वरूपों का वर्णन देखने को मिलता है। इन्हीं दिव्य स्वरूपों में से एक स्वरूप भगवान बटुक भैरव का भी है। 'बटुक' शब्द का मतलब छोटा 'बालक' या 'ब्रह्मचारी' होता है।
भगवान शिव का बटुक भैरव अवतार उस स्वरूप को धारण करता है, जो शांत, सौम्य, सरल, करुणामय और आसानी से मान दान वाले देवता हैं। भक्तों का मानना है कि, बटुक भैरव की पूजा करने से जीवन में डर, संकट, शत्रु बाधा और नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलती है।
बटुक भैरव की उत्पत्ति से जुड़ी कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक ऐसा राक्षस जिसे देखकर देवता भी भय से भर गए थे। तब भगवान शिव ने न तो त्रिशूल उठाय, न ही रौद्र रूप धारण किया, बल्कि 5 साल के बच्चे का रूप धारण कर लिया। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, एक असुर जिसका नाम आपद था। उसने कठिन तपस्या के जरिए दैवीय शक्तियां हासिल कर ली थी। अपाद नाम का यह असुर अपनी शक्तियों से ऋषियों, देवताओं और निर्दोष लोगों को परेशान करने लगा। उसका आतंक दिन पर दिन बढ़ता ही चला गया।
असुर आपद को यह वरदान प्राप्त था कि, कोई भी शक्तिशाली योद्धा उसे आसानी से हरा नहीं सकता था। यही वजह थी कि, देवता भी इस असुर को लेकर चिंतित हो गए। सभी देवता भगवान शिव से मदद की गुहार लगाने लगे। सभी देवताओं को लगने लगा कि, महादेव रौद्र स्वरूप में आएंगे, लेकिन हुआ कुछ अलग। भगवान शिव ने 5 साल के बटुक का रूप धारण कर लिया। इसी बाल स्वरूप को बटुक भैरव कहा जाता है। बटुक का मतलब छोटा-सा बालक।
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बटुक भैरव को देखकर राक्षस आपद हंस पड़ा, जिसे देवता भी रोक नहीं पाए, उसे एक बच्चा रोकेगा। लेकिन अगले ही क्षण उसका अहंकार चूर हो गया। बटुक भैरव ने आपद नाम के असुर का वध कर दिया। यहीं से बटुक भैरव को आपदुद्धारक बटुक भैरव कहा जाने लगा।
आपदुद्धारक बटुक भैरव यानी भगवान शिव के बाल रूप और उग्र भैरव अवतार, जो भक्तों को सभी तरह की समस्या से मुक्ति दिलाते हैं। भगवान बटुक भैरव की पूजा में आपदुद्धारक बटुक भैरव स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत शुभ और कल्याणकारी माना जाता है।
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