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    द्रौपदी ने सच में दुर्योधन को कहा था 'अंधे का पुत्र अंधा'? क्या कहती है वेद व्यास की महाभारत

    Updated: Wed, 27 May 2026 01:19 PM (IST)

    क्या सच में द्रौपदी ने दुर्योधन को "अंधे का पुत्र अंधा" कहा था, जिसे कई लोग महाभारत युद्ध का आधार मानते हैं। चलिए जानते हैं इसकी पूरी सच्चाई। ...और पढ़ें

    वेद व्यास की महाभारत का सच (Picture Credit- AI Generated)

    वेद व्यास की महाभारत का सच (Picture Credit- AI Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। महाभारत में कौरवों और पांडवों के बीच हुई द्यूतक्रीड़ा यानी चौसर का खेल महाभारत युद्ध का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। लेकिन वहीं कुछ लोग द्रौपदी द्वारा दुर्योधन को कहे गए एक वाक्य को पूरी महाभारत का कारण मानते हैं। क्या आप इस वाक्य के पीछे का सच जानते हैं?

    क्या द्रौपदी ने सच में कहा था 'अंधे का पुत्र अंधा'?

    एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार, महाभारत के मूल ग्रंथ (व्यास महाभारत) के अनुसार द्रौपदी ने दुर्योधन को कभी भी "अंधे का पुत्र अंधा" नहीं कहा था। यह पूरी तरह से एक काल्पनिक प्रसंग है, जो बाद के समय में नाटकों और लोक-कथाओं में सम्मिलित किया गया है। मूल कथा के अनुसार, जब दुर्योधन इंद्रप्रस्थ के मायावी महल में घूम रहा था, तब वह पानी को जमीन समझकर एक कुंड में गिर गया था।

    उसे गिरता देखकर भीम, अर्जुन और जुड़वां भाई (नकुल और सहदेव) जोर से हंस पड़े थे। दुर्योधन के इस अपमान के समय द्रौपदी वहां उपस्थित भी नहीं थीं। किंतु कहीं-कहीं यह भी उल्लेख मिलता है कि द्रौपदी केवल हंसी थीं, परंतु उन्होंने मुंह से कुछ भी नहीं बोला था। चूंकि दुर्योधन उनके जेठ थे, इसलिए उनके लिए ऐसी कड़वी बातों का उपयोग व्यावहारिक रूप से संभव नहीं लगता है।

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    (Picture Credit- AI Generated)

    किसने बनाया था वह मायावी महल?

    धृतराष्ट्र ने कौरवों और पांडवों के बीच के युद्ध को टालने के लिए द्रौपदी के स्वयंवर के बाद उन्हें रहने के लिए खांडवप्रस्थ नामक एक सूखा, उजाड़ और बंजर जंगल दिया था। भगवान कृष्ण की सहायता और वास्तुकार विश्वकर्मा के शिल्प कौशल से पांडवों ने इसे एक अत्यंत भव्य नगरी 'इंद्रप्रस्थ' में बदल दिया था। इसी नगरी में युद्धि‍ष्‍ठि ने राजसूय यज्ञ का आयोजन क‍िया, ज‍िसमें दुर्योधन सह‍ित भारतवर्ष भर के राजा-महाराजा शामिल हुए थे। 

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    यज्ञ संपन्न होने के बाद, दुर्योधन, मयासुर द्वारा निर्मित राजमहल को देखने के लिए इन्द्रप्रस्थ में ही रुक गया था। मयासुर एक अद्वितीय और महान वास्तुकार, शिल्पी और मायावी संरचनाओं का रचयिता था। जब दुर्योधन महल का भ्रमण कर रहा था, तब उसने पानी से भरे एक तालाब (जलाशय) को ठोस भूमि समझ लिया और उसमें जा गिरा। माना जाता है कि इंद्रप्रस्थ नगरी और पांडवों के इस महल ने दुर्योधन के मन में उनके प्रति घृणा को और भी अधिक बढ़ा दिया था।

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।