Masan Holi 2026: काशी में क्यों खेली जाती है चिता की भस्म से मसान होली, कैसे शुरू हुई ये परंपरा?
मसान होली चिता की भस्म से अनोखी होली खेली जाती है। यह परंपरा सदियों पुरानी है और माना जाता है कि इसकी शुरुआत स्वयं भगवान शिव ने की थी। ...और पढ़ें

मसान होली का धार्मिक महत्व (Image Source: AI-Generated)

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दिव्या गौतम, एस्ट्रोपत्री। दुनियाभर में होली रंगों और गुलाल के साथ 4 मार्च 2026 (Holi 2026) को मनाई जाएगी, लेकिन बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में एक ऐसी होली खेली जाती है जो अद्भुत भी है और अकल्पनीय भी। वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर चिता की भस्म से होली खेलने की यह परंपरा सदियों पुरानी है।
इस वर्ष 27 फरवरी 2026 को रंगभरी एकादशी मनाई जाएगी और इसके अगले दिन, 28 फरवरी को मसान होली (Masan Holi 2026 Date) का उत्सव होगा। जहां एक ओर श्मशान का नाम सुनकर मन में भय उत्पन्न होता है। वहीं, महादेव के भक्त यहां राख उड़ाकर मृत्यु के उत्सव का आनंद लेते हैं। इस अनोखी होली को 'मसान होली' कहा जाता है। माना जाता है कि इस परंपरा की शुरुआत स्वयं भगवान शिव ने की थी, जिसके पीछे एक गहरा आध्यात्मिक कारण छिपा है।
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पौराणिक कथाओं की मानें तो फाल्गुन महीने की रंगभरी एकादशी पर महादेव माता पार्वती की विदाई कराकर पहली बार काशी आए थे। उस खुशी में उन्होंने अपने भक्तों और गणों के साथ मिलकर खूब गुलाल उड़ाया और जश्न मनाया। मगर महादेव के कुछ प्रिय भक्त जैसे भूत-प्रेत, पिशाच और अघोरी इस उत्सव का हिस्सा नहीं बन पाए थे।
शिव तो सबकी चिंता करने वाले हैं, वे अपने किसी भी भक्त को अकेला कैसे छोड़ सकते थे? इसीलिए, एकादशी के अगले दिन महादेव खुद मणिकर्णिका घाट पहुंचे। वहां उन्होंने श्मशान में रहने वाले अपने उन खास भक्तों के साथ जलती चिताओं की राख से होली खेली। तभी से काशी में मसान होली (Masan Holi 2026 Histroy) की यह अनोखी परंपरा चली आ रही है।
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मृत्यु का उत्सव और शिव की सहजता
मसान होली हमें सिखाती है कि महादेव की नजर में कुछ भी बुरा या अपवित्र नहीं है। उनके लिए जीवन का उल्लास और मृत्यु की शांति, दोनों एक समान हैं। श्मशान की राख से होली खेलना इस बात का संकेत है कि मौत जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। जहां एक तरफ महादेव देव के देव हैं वहीं, श्मशान में अघोरियों के साथ राख में भी खुश हैं। इस दिन जब डमरू की गूंज के बीच भक्त भस्म को गुलाल की तरह हवा में उड़ाते हैं, तो वह नजारा देखने लायक होता है। यह परंपरा हमें समझाती है कि शरीर तो एक दिन मिट्टी में मिल जाना है, इसलिए हर हाल में खुश रहना चाहिए।
ग्रहों की शांति और आध्यात्मिक लाभ
ज्योतिषीय दृष्टि से देखा जाए तो भस्म को पवित्र और नकारात्मकता को दूर करने वाला माना गया है। मसान होली के दिन शिव की भक्ति करने से कुंडली के कई प्रतिकूल दोष शांत होने की संभावना रहती है। जो लोग मानसिक अशांति या अज्ञात भय की आशंका से घिरे होते हैं, उनके लिए महादेव का यह स्वरूप अत्यंत कल्याणकारी है। इस दिन भस्म का तिलक लगाना मन को स्थिर करता है और व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास बढ़ाता है। यह समय हमें सिखाता है कि हम अपने जीवन का संचालन ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण के साथ करें।
लेखक: दिव्या गौतम, Astropatri.com अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए hello@astropatri.com पर संपर्क करें।
