यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 07, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Masik Krishna Janmashtami 2025: साल की पहली मासिक जन्माष्टमी पर इस तरह करें लड्डू गोपाल की पूजा
पंचांग के अनुसार हर माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत किया जाता है। इस दिन पर भगवान श्रीकृष्ण की विधि-विधानपूर्वक पूज ...और पढ़ें

HighLights
- हर माह की अष्टमी तिथि पर मनाई जाती है मासिक कृष्ण जन्माष्टमी।
- इस तिथि पर भगवान कृष्ण की होती है पूजा-अर्चना।
- साधक को मिलता है सुख-समृद्धि का आशीर्वाद।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी (Masik Krishna Janmashtami 2025) के दिन आप भगवान श्रीकृष्ण की विधिवत रूप से पूजा-अर्चना करने से साधक को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। ऐसे में आप माघ माह की मासिक जन्माष्टमी, जो साल 2025 की पहली मासिक जन्माष्टमी होने वाली है, पर आप लड्डू गोपाल की पूजा-अर्चना कर उनकी विशेष कृपा के पात्र बन सकते हैं।
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी शुभ मुहूर्त (Masik Janmashtami Shubh Muhurat)
माघ माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ 21 जनवरी को दोपहर 12 बजकर 39 मिनट पर हो रहा है। वहीं इस तिथि का समापन 22 जनवरी को दोपहर 03 बजकर 18 मिनट पर होगा। मासिक कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा मध्य रात्रि में करने का विधान है, ऐसे में मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत मंगलवार, 21 जनवरी को किया जाएगा। इस दिन पूजा का मुहूर्त कुछ इस प्रकार रहेगा -
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी शुभ मुहूर्त - रात्रि 12 बजकर 06 मिनट से रात्रि 12 बजकर 59 मिनट तक
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मासिक जन्माष्टमी पूजा विधि
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत हो जाएं। इसके बाद भगवान कृष्ण का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। लड्डू गोपाल को पंचामृत से स्नान करवाने के बाद पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करवाएं। अब लड्डू गोपाल को नए वस्त्र पहनाएं और उनका शृंगार करें। भोग के रूप में आप उन्हें माखन मिश्री में तुलसी दल डालकर अर्पित करें। घी का एक दीपक जलाएं और लड्डू गोपाल की आरती व मंत्रों का जप करें।
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भगवान कृष्ण के मंत्र -
- ॐ कृष्णाय नमः
- ॐ नमो भगवते श्री गोविन्दाय
- ॐ देव्किनन्दनाय विधमहे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्ण:प्रचोदयात
- ओम क्लीम कृष्णाय नमः
- गोकुल नाथाय नमः
- ॐ श्री कृष्णः शरणं ममः
- हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे । हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ।।
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