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    बाबा विश्वनाथ के दर्शन के बाद अगर ये नहीं किया, तो अधूरा रह जाएगा काशी यात्रा का पुण्य

    Updated: Fri, 10 Jul 2026 10:29 AM (IST)

    काशी में बाबा विश्वनाथ 12 ज्योतिर्लिंग में शामिल है। कई श्रद्धालु काशी यात्रा के दौरान दो बड़ी गलती करते हैं, जिससे उनकी यात्रा अधूरी मानी जाती है। ...और पढ़ें

    काशी विश्वनाथ यात्रा के दौरान कौन-सी गलतियों से बचना चाहिए? (Pic Credits- AI Image)

    काशी विश्वनाथ यात्रा के दौरान कौन-सी गलतियों से बचना चाहिए? (Pic Credits- AI Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थित शिवलिंग भी है। भगवान शिव की भक्ति को समर्पित इस मंदिर को सोने का मंदिर भी कहा जाता है, क्योंकि मंदिर के शिखर को 800 किलो सोने की परतों से सजाया गया है।

    कहा जाता है कि, काशी शहर को शिव ने बसाया है, जो प्रलय आने पर भी सुरक्षित रहेगा। काशी को लेकर कई मान्यताएं प्रचलित हैं। माना जाता है कि, काशी में मरने वाले लोगों को मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि काशी को अमर भूमि कहा जाता है।

    कई लोग भगवान विश्वनाथ के दर्शन के लिए काशी पहुंचते हैं, लेकिन जाने-अनजाने में उनसे ऐसी गलती हो जाती है, जिस वजह से उन्हें काशी यात्रा का पुण्य प्राप्त नहीं होता है।

    काशी विश्वनाथ

    काशी विश्वनाथ (AI Image)

    काशी में विश्व के नाथ विराजमान

    स्कंद पुराण के काशी खंड में विवरण मिलता है कि, काशी को स्वयं भगवान शिव द्वारा बसाया गया था। जहां नाथों के नाथ विश्वनाथ विराजमान हैं। बाबा विश्वनाथ काशी के राजा है और काल भैरव उनके कोतवाल हैं।

    भगवान काल भैरव शिव की नगरी काशी की रक्षा करते हैं। माना जाता है कि, काल भैरव के दर्शन मात्र से ही शनि के साढ़ेसाती, ढैय्या और शनि दंड से मुक्ति मिलती है।

    काशी के कोतवाल कहे जाने वाले बाबा काल भैरव की इजाजत के बिना यमराज यहां किसी के प्राण नहीं हर सकते हैं। माना जाता है कि, काशी में दंड देने का अधिकार सिर्फ और सिर्फ काल भैरव बाबा के पास है।

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    काशी विश्वनाथ जाए को ये गलती भूलकर भी नहीं करें?

    जीवन में जब कभी भी काशी जाने का मौका मिले तो एक बात हमेशा ध्यान रखें कि, काशी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन के बाद काल भैरव के दर्शन करना बेहद जरूरी है। माना जाता है कि, जो भक्त बाबा विश्वनाथ के दर्शन के बाद काल भैरव के दर्शन नहीं करता है, उसकी काशी की यात्रा अधूरी मानी जाती है।

    काशी विश्वनाथ  (1)

    काशी से गंगाजल क्यों नहीं लाना चाहिए?

    हममें से अधिकतर लोग काशी जाते हैं, तो गंगा स्नान करते हैं, जो सही भी है, लेकिन नहाने के बाद एक सामान्य-सी गलती कर बैठते हैं वो काशी से गंगाजल भरकर लाने की। माना जाता है कि, काशी से गंगाजल लाने की व्यवस्था नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि काशी को चिता भूमि माना जाता है।

    काश्यां मरणं मुक्ति:

    यानी-काशी में मौत, मोक्ष का द्वार है। काशी मोक्षप्रदायिनी नगरी है, जहां मणिकर्णिका घाट पर सिर्फ शरीर जलता ही नहीं, बल्कि आत्मा भी मुक्त हो जाती है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।