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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 05, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Mohini Ekadashi 2024: कब मनाई जाएगी मोहिनी एकादशी? यहां जानिए सही डेट -शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    Updated: Sun, 05 May 2024 11:00 AM (IST)

    हिंदू धर्म में एकादशी (Ekadashi in May 2024) का व्रत बहुत मंगलकारी माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के भक्त उन्हें प्रसन्न करने के लिए कठिन व्रत रखते ...और पढ़ें

    Mohini Ekadashi 2024: मोहिनी एकादशी पूजा विधि
    Mohini Ekadashi 2024: मोहिनी एकादशी पूजा विधि

    HighLights

    1. मोहिनी एकादशी को भारत में सबसे शुभ त्योहारों में से एक माना जाता है।
    2. इस दिन भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा होती है।
    3. मोहिनी एकादशी का व्रत 19 मई को रखा जाएगा।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Mohini Ekadashi 2024: मोहिनी एकादशी को भारत में सबसे शुभ त्योहारों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मोहिनी एकादशी सभी एकादशी में सबसे महत्वपूर्ण होती है। इस दिन भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा होती है। पंचांग के अनुसार, प्रत्येक साल यह व्रत वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है, जो भक्त इस दिन श्री हरि की विधि-विधान के साथ पूजा करते हैं उन्हें सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

    मोहिनी एकादशी की तिथि और शुभ मुहूर्त

    मोहिनी एकादशी 18 मई, 2024 सुबह 11 बजकर 23 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इसका समापन अगले दिन 19 मई, 2024 दोपहर 1 बजकर 50 मिनट पर होगा। पंचांग के अनुसार, मोहिनी एकादशी का व्रत 19 मई, 2024 को रखा जाएगा।

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    मोहिनी एकादशी पूजा विधि

    • भक्त सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करें।
    • घर और विशेषकर पूजा कक्ष को अच्छी तरह से साफ करें।
    • भगवान विष्णु, भगवान कृष्ण और लड्डू गोपाल जी की प्रतिमा को स्थापित कर उनका अभिषेक करें।
    • उन्हें पीले वस्त्रों से सजाएं और पीले चंदन का तिलक लगाएं।
    • मूर्ति के सामने देसी घी का दीपक जलाएं और पूरी श्रद्धा से एकादशी व्रत करने का संकल्प लें।
    • 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का 108 बार जाप करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
    • भगवान को पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें।
    • पूजा का समापन आरती से करें।
    • शाम के समय भी भगवान विष्णु की पूजा विधि अनुसार करें।
    • अगले दिन द्वादशी तिथि में व्रत का पारण पूजा के बाद करें।
    • गरीबों व ब्राह्मणों को भोजन खिलाएं और दान-दक्षिणा दें।
    • इस दिन किसी के बारे में बुरा न बोलें।

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