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    रहस्यमयी है तिरुपति बालाजी की मूर्ति, पसीना आने से लेकर समुद्र की आवाज तक, पढ़ें सब कुछ

    Updated: Sun, 12 Apr 2026 09:26 AM (IST)

    भगवान वेंकटेश्वर मंदिर के गर्भ गृह का तापमान अक्सर सामान्य से अधिक रहता है। मंदिर से जुड़े ऐसे कई रहस्य हैं, जो बेहद हैरान करने वाले हैं। आइए जानते है ...और पढ़ें

    Tirupati Balaji Mystery: क्या सच में तिरुपति बालाजी की मूर्ति को आता है पसीना?

    Tirupati Balaji Mystery: क्या सच में तिरुपति बालाजी की मूर्ति को आता है पसीना?

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश की पहाड़ियों में स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर न केवल अपनी भव्यता और अटूट आस्था के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां होने वाले चमत्कार विज्ञान को भी सोचने पर मजबूर कर देते हैं। भगवान वेंकटेश्वर की इस पावन प्रतिमा से जुड़ी कई ऐसी मान्यताएं और रहस्य हैं, जो सदियों से भक्तों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

    Tirupati Balaji Mystery 1

    Ai Generated Image

    प्रतिमा से निकलने वाला पसीना

    तिरुपति बालाजी मंदिर का सबसे बड़ा रहस्य भगवान की प्रतिमा से निकलने वाला पसीना है। मंदिर का गर्भ गृह काफी ठंडा रखा जाता है, लेकिन इसके बावजूद भगवान वेंकटेश्वर की मूर्ति का तापमान हमेशा सामान्य से अधिक रहता है। सुबह की पूजा के समय अक्सर मूर्ति पर पसीने की बूंदें चमकती नजर आती हैं, जिन्हें पुजारी रेशमी वस्त्र से पोंछते हैं। किसी के पास इसका कोई ठोस जवाब नहीं है कि एक पत्थर की मूर्ति का तापमान स्थिर कैसे रह सकता है।

    लहरों का शोर और असली बाल

    एक और हैरान कर देने वाला रहस्य यह है कि जब आप भगवान की प्रतिमा के पीछे कान लगाते हैं, तो वहां से समुद्र की लहरों की आवाज सुनाई देती है। लोग इसे भगवान के निवास क्षीर सागर से जोड़कर देखते हैं। इसके अलावा, माना जाता है कि भगवान बालाजी की मूर्ति पर लगे बाल असली हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान के बाल कट गए थे, तब एक गंधर्व राजकुमारी नीला देवी ने अपने बाल उन्हें अर्पित किए थे। माना जाता है कि वे बाल आज भी प्रतिमा पर मौजूद हैं।

    भगवान साक्षात हैं विराजमान

    मंदिर में जाने वाले कई भक्तों का अनुभव है कि उन्हें मूर्ति को देखकर ऐसा लगता है मानो भगवान साक्षात वहां विराजमान हैं। मूर्ति (ठोड़ी) को चढ़ाया जाने वाला पचा कपूर यानी ऐसा कपूर जो अगर किसी साधारण पत्थर पर लगाया जाए, तो पत्थर चटक जाता है, लेकिन भगवान वेंकटेश्वर की मूर्ति पर इसका कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता।

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    मंदिर का महत्व

    तिरुपति बालाजी केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था और विज्ञान के बीच का एक अद्भुत रहस्य है। यहां होने वाले चमत्कार भक्तों के विश्वास को और भी गहरा करते हैं। चाहे वह प्रतिमा का पसीना हो या लहरों की गूंज, ये सभी बातें इस मंदिर को दुनिया का सबसे अनोखा और दिव्य स्थान बनाती हैं।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।