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जब नीम करोली बाबा ने बता दी थी अपने देह त्याग की तारीख, डायरी के 'खाली पन्ने' में छिपा था महासमाधि का रहस्य!

Published: Fri, 11 Sep 2026 01:40 PM (IST)Updated: Sat, 12 Sep 2026 09:33 AM (IST)

आज नीम करोली बाबा की 53वीं पुण्यतिथि है, जिन्होंने 11 सितंबर 1973 को महासमाधि ली थी। जानिए कैसे नीम करोली बाबा ने खुद तय की थी अपनी महासमाधि की तारीख?

नीम करोली बाबा की समाधि की कहानी

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। बीते कई हफ्तों से हनुमान जी के परम भक्त कहे जाने वाले नीम करोली बाबा पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' का डंका देश-विदेश में बज रहा है। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। फिल्म की अपार सफलता के बाद उत्तराखंड के नैनीताल स्थित कैंची धाम में नीम करोली बाबा के दर्शन के लिए भारी संख्या में भक्तों की भीड़ पहुंच रही है।

आज के दिन 11 सितंबर, 1973 के दिन बाबा नीम करोली ने अपना देह त्यागा था। आज उनकी 53वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। महाराज जी का वर्णन करना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि उनका वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता है।

महाराज जी के बारे में कहा जाता है कि, किशोरावस्था में उन्होंने सारी संपत्ति और ऐश्वर्य त्याग कर अपना पैतृक घर छोड़ दिया और गुजरात चले गए। 6 से 7 साल तक वे वैष्णव संत के रूप में योग साधना में लीन रहे। यहीं से उन्हें बाबा लक्ष्मणदास के नाम से जाना जाने लगा।

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बाबा जी के जीवन के आखिरी ढाई साल कैसे बीते?

बाबा जी किसी भी एक स्थान पर लंबे समय तक निवास नहीं करते थे। आज यहां, कल वहां...कैंची, वृंदावन, हनुमानगढ़, भूमिधर आदि के मंदिरों में भी थोड़े समय के लिए ही रहते थे।

नीम करोली बाबा के बारे में कहा जाता है कि, वे अपने सांसारिक जीवन के आखिरी ढाई साल में अधिकतर समय कैंची और वृंदावन के आश्रम में रहे। बाबा जी हमेशा कहते थे कि, राम के नाम से सभी काम पूरे हो जाते हैं। बाबा का 'राम नाम' लिखने का यह काम भक्तों के लिए एक आदर्श बन गया।

नीम करोली बाबा अपनी यात्राओं के दौरान एक डायरी अपने साथ रखते थे। 9 सितंबर, 1973 को हमेशा की तरह बाबा जी ने डायरी में तारीख लिखी और पन्ना भर दिया। इसके बाद उन्होंने दूसरे पन्ने पर 10 सितंबर की तारीख लिखी और उसे भी भर दिया।

फिर उन्होंने तीसरे पन्ने पर 11 सितंबर की तारीख लिखी, लेकिन उसे खाली छोड़ दिया और डायरी श्री सिद्धि मां को सौंपते हुए कहा कि, 'मां, अब यह डायरी आपकी है, आप इसमें आगे लिखेंगी।' बाबा जी के ऐसा कहने के पीछे एक कार्य छिपा था।

इस तरह 11 सितंबर को जब नीम करोबी बाबा ने अपना नश्वर शरीर त्याग दिया, तो उन्होंने डायरी में एक पन्ना खाली छोड़ दिया, जो उनके भौतिक रूप के अंत का संकेत माना जाता था।

बाबा जी के समाधि लेने पर देवराह बाबा ने क्या कहा? 

11 सितंबर, 1973 अनंत चतुर्दशी का बेहद शुभ दिन था, जो हिंदुओं के लिए बेहद मायने रखता है। इस दिन, अपनी पूर्वनियोजित योजना के मुताबिक, वृंदावन के रामकृष्ण मिशन अस्पताल में करीब 1:15 मिनट पर बाबा ने अपने महासमाधि ले ली।

कहा जाता है कि, बाबा नीम करौली के प्राण त्यागने के बाद अपने भक्तों से बातचीत के दौरान मायावी बताते हुए महान संत और योगी राज देवराह बाबा ने कहा था कि, उन्होंने पहले भी कई ऐसे चमत्कार दिखाए हैं। वे कहां जा सकते हैं? वे जीवित हैं और हमेशा जीवित रहेंगे।

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Source- shreekainchimandirtrust.org

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।

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