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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 04, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Onam 2023: कब मनाया जाएगा ओणम पर्व? जानिए तिथि और क्या है इस पर्व का महत्व

    By Shantanoo MishraEdited By: Shantanoo Mishra
    Updated: Fri, 04 Aug 2023 01:57 PM (IST)

    Onam 2023 मलयालम कैलेंडर के चिंगम महीने में ओणम पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से दक्षिण भारत में मनाया जाता है। बता दें कि चिंगम माह ...और पढ़ें

    Onam 2023: कब मनाया जाएगा ओणम पर्व?
    Onam 2023: कब मनाया जाएगा ओणम पर्व?

    HighLights

    1. क्षिण भारत में ओणम पर्व को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है।
    2. मलयालम कैलेंडर के अनुसार चिंगम माह में ओणम पर्व मनाया जाता है।
    3. आइए जानते हैं, कब मनाया जाएगा ओणम पर्व और इस पर्व का महत्व?

    नई दिल्ली, अध्यात्म डेस्क । Onam 2023: दक्षिण भारत में ओणम पर्व को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पर्व विशेष रूप से केरल में धूमधाम से मनाया जाता है। मलयालम कैलेंडर के अनुसार चिंगम माह में जब थिरुवोणम नक्षत्र प्रबल स्थिति में होता है, उस दिन ओणम पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है मनाया जाता है। यह पर्व हर साल मलयालम कैलेंडर के पहले महीने में मनाया जाता है। मान्यता है कि ओणम के शुभ अवसर पर राजा महाबली अपनी प्रजा से मिलने आते हैं। राजा महाबली के आगमन की खुशी में 10 दिनों तक इस पर्व को मनाया जाता है। आइए जानते हैं, कब मनाया जाएगा ओणम पर्व और इस पर्व का महत्व?

    ओणम 2023 तिथि

    मलयालम पंचांग के अनुसार, थिरुवोणम नक्षत्र 29 अगस्त रात्रि 02 बजकर 43 मिनट पर प्रारंभ होगी और इस तिथि का समापन 29 अगस्त रात्रि 11 बजकर 50 मिनट पर हो जाएगी। ऐसे में थिरुवोणम या ओणम पर्व 29 अगस्त 2023, मंगलवार के दिन मनाया जाएगा।

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    ओणम 2023 कैलेंडर

    पहला ओणम- 28 अगस्त 2023, सोमवार

    थिरुवोणम- 29 अगस्त 2023, मंगलवार

    तीसरा ओणम- 30 अगस्त 2023, बुधवार

    चौथा ओणम- 31 अगस्त 2023, गुरुवार

    ओणम पर्व का महत्व क्या है?

    ओणम पर्व मलयालम कैलेंडर के चिंगम मास में मनाया जाता है। इस पर्व को भगवान विष्णु द्वारा लिए गए वामन अवतार और दैत्य राज महाबली के पाताललोक से धरती लोक पर आने के उपलक्ष में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, थिरुवोणम के दिन राजा महाबली प्रत्येक मलयाली घर में जाकर अपनी प्रजा से मिलते हैं। उन्हीं के स्वागत में इस दिन घर को अच्छे से सजाया जाता है और साफ-सफाई रखी जाती है। किंवदंतियों के अनुसार, भगवान विष्णु ने दैत्य राज महाबली की भक्ति से प्रसन्न होकर यह वरदान दिया था कि वह साल में एक बार अपनी प्रजा से मिलने धरती लोक पर आ सकता है।

    डिसक्लेमर: इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहे।

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