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    क्या है पद्मिनी एकादशी पर तुलसी नाम जप का महत्व? यहां पढ़ें पूजा विधि और जरूरी नियम

    Updated: Sat, 02 May 2026 01:15 PM (IST)

    पद्मिनी एकादशी पर मां तुलसी के नामों का जप करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ...और पढ़ें

    पुरुषोत्तम मास की एकादशी: तुलसी नामाष्टक का पाठ लाएगा घर में सुख-समृद्धि। Ai Generated Image

    पुरुषोत्तम मास की एकादशी: तुलसी नामाष्टक का पाठ लाएगा घर में सुख-समृद्धि। Ai Generated Image

    HighLights

    1. पद्मिनी एकादशी पर तुलसी पूजा का बड़ा महत्व है

    2. इस दिन तुलसी नामाष्टक का जप परम फलदायी माना गया है

    3.  इस दिन दान-पुण्य करने से अक्षय फलों की प्राप्ति होती है

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में अधिक मास यानी पुरुषोत्तम माह की एकादशी को पद्मिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह एकादशी अन्य एकादशी से अधिक फलदायी मानी जाती है। इस पावन तिथि पर जहां श्री हरि के पूजन का विधान है, वहीं माता तुलसी की पूजा-अर्चना का भी विशेष महत्व बताया गया है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी भगवान विष्णु को बेहद प्रिय है और उनके बिना विष्णु जी का कोई भी भोग स्वीकार्य नहीं होता है। पद्मिनी एकादशी पर मां तुलसी के आठ नामों का जप करने से व्यक्ति के जीवन से दरिद्रता का नाश होता है और घर में स्थिर लक्ष्मी का वास होता है।

    तुलसी नाम जप का आध्यात्मिक महत्व

    पद्मिनी एकादशी पर मां तुलसी के आठ नामों (तुलसी नामाष्टक) का जप करना बहुत कल्याणकारी माना गया है। ये आठ नाम हैं - वृंदा, वृंदानी, विश्वपावनी, विश्वपूजिता, पुष्पसारा, नंदिनी, तुलसी और कृष्णजीवनी।  मान्यता है कि इस एकादशी पर जो व्यक्ति तुलसी नामाष्टक का पाठ करता है, उसे अश्वमेध यज्ञ के समान फल मिलता है। यह पाठ न केवल मन को शांति देता है, बल्कि घर की नकारात्मक ऊर्जा को भी दूर करता है। साथ ही भगवान विष्णु की असीम कृपा भी प्राप्त होती है।

    पूजा विधि

    एकादशी के दिन सुबह जल्दी स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें।
    तुलसी के पौधे के पास शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
    पद्मिनी एकादशी पर मिट्टी और पीतल का दीपक जलाना बहुत शुभ होता है।
    तुलसी के पौधे की कम से कम तीन या सात बार परिक्रमा करें।
    परिक्रमा के दौरान ऊपर बताए गए तुलसी के आठ नामों का जप करें।

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    न करें ये गलतियां

    • एकादशी तिथि पर तुलसी के पत्ते न तोड़ें।
    • बिना स्नान किए या अशुद्ध अवस्था में तुलसी को न छुएं।
    • शाम के समय तुलसी के पास दीपक जलाते समय मौन रहें और केवल उनके नामों का मानसिक जप करें।
    • इस दिन घर में पूर्ण सात्विकता रखें, ताकि तुलसी पूजन का पूरा लाभ मिल सके।
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    ।।तुलसी जी के 108 नाम।।

    1.ॐ श्री तुलस्यै नमः।

    2.ॐ नन्दिन्यै नमः।

    3.ॐ देव्यै नमः।

    4.ॐ शिखिन्यै नमः।

    5.ॐ धारिण्यै नमः।

    6.ॐ धात्र्यै नमः।

    7.ॐ सावित्र्यै नमः।

    8.ॐ सत्यसन्धायै नमः।

    9.ॐ कालहारिण्यै नमः।

    10.ॐ गौर्यै नमः।

    11.ॐ देवगीतायै नमः।

    12.ॐ द्रवीयस्यै नमः।

    13.ॐ पद्मिन्यै नमः।

    14.ॐ सीतायै नमः।

    15.ॐ रुक्मिण्यै नमः।

    16.ॐ प्रियभूषणायै नमः।

    17.ॐ श्रेयस्यै नमः।

    18.ॐ श्रीमत्यै

    19.ॐ मान्यायै नमः।

    20.ॐ गौर्यै नमः।

    21.ॐ गौतमार्चितायै नमः।

    22.ॐ त्रेतायै नमः।

    23.ॐ त्रिपथगायै नमः।

    24.ॐ त्रिपादायै नमः।

    25.ॐ त्रैमूर्त्यै नमः।

    26.ॐ जगत्रयायै नमः।

    27.ॐ त्रासिन्यै नमः।

    28.ॐ गात्रायै नमः।

    29.ॐ गात्रियायै नमः।

    30.ॐ गर्भवारिण्यै नमः।

    31.ॐ शोभनायै नमः।

    32.ॐ समायै नमः।

    33.ॐ द्विरदायै नमः।

    34.ॐ आराद्यै नमः।

    35.ॐ यज्ञविद्यायै नमः।

    36.ॐ महाविद्यायै नमः।

    37.ॐ गुह्यविद्यायै नमः।

    38.ॐ कामाक्ष्यै नमः।

    39.ॐ कुलायै नमः।

    40.ॐ श्रीयै नमः।

    41.ॐ भूम्यै नमः।

    42.ॐ भवित्र्यै नमः।

    43.ॐ सावित्र्यै नमः।

    44.ॐ सरवेदविदाम्वरायै नमः।

    45.ॐ शंखिन्यै नमः।

    46.ॐ चक्रिण्यै नमः।

    47.ॐ चारिण्यै नमः।

    48.ॐ चपलेक्षणायै नमः।

    49.ॐ पीताम्बरायै नमः।

    50.ॐ प्रोत सोमायै नमः।

    51.ॐ सौरसायै नमः।

    52.ॐ अक्षिण्यै नमः।

    53.ॐ अम्बायै नमः।

    54.ॐ सरस्वत्यै नमः।

    55.ॐ सम्श्रयायै नमः।

    56.ॐ सर्व देवत्यै नमः।

    57.ॐ विश्वाश्रयायै नमः।

    58.ॐ सुगन्धिन्यै नमः।

    59.ॐ सुवासनायै नमः।

    60.ॐ वरदायै नमः।

    61.ॐ सुश्रोण्यै नमः।

    62.ॐ चन्द्रभागायै नमः।

    63.ॐ यमुनाप्रियायै नमः।

    64.ॐ कावेर्यै नमः।

    65.ॐ मणिकर्णिकायै नमः।

    66.ॐ अर्चिन्यै नमः।

    67.ॐ स्थायिन्यै नमः।

    68.ॐ दानप्रदायै नमः।

    69.ॐ धनवत्यै नमः।

    70.ॐ सोच्यमानसायै नमः।

    71.ॐ शुचिन्यै नमः।

    72.ॐ श्रेयस्यै नमः।

    73.ॐ प्रीतिचिन्तेक्षण्यै नमः।

    74.ॐ विभूत्यै नमः।

    75.ॐ आकृत्यै नमः।

    76.ॐ आविर्भूत्यै नमः।

    77.ॐ प्रभाविन्यै नमः।

    78.ॐ गन्धिन्यै नमः।

    79.ॐ स्वर्गिन्यै नमः।

    80.ॐ गदायै नमः।

    81.ॐ वेद्यायै नमः।

    82.ॐ प्रभायै नमः।

    83.ॐ सारस्यै नमः।

    84.ॐ सरसिवासायै नमः।

    85.ॐ सरस्वत्यै नमः।

    86.ॐ शरावत्यै नमः।

    87.ॐ रसिन्यै नमः।

    88.ॐ काळिन्यै नमः।

    89.ॐ श्रेयोवत्यै नमः।

    90.ॐ यामायै नमः।

    91.ॐ ब्रह्मप्रियायै नमः।

    92.ॐ श्यामसुन्दरायै नमः।

    93.ॐ रत्नरूपिण्यै नमः।

    94.ॐ शमनिधिन्यै नमः।

    95.ॐ शतानन्दायै नमः।

    96.ॐ शतद्युतये नमः।

    97.ॐ शितिकण्ठायै नमः।

    98.ॐ प्रयायै नमः।

    99.ॐ धात्र्यै नमः।

    100.ॐ श्री वृन्दावन्यै नमः।

    101.ॐ कृष्णायै नमः।

    102.ॐ भक्तवत्सलायै नमः।

    103.ॐ गोपिकाक्रीडायै नमः।

    104.ॐ हरायै नमः।

    105.ॐ अमृतरूपिण्यै नमः।

    106.ॐ भूम्यै नमः।

    107.ॐ श्री कृष्णकान्तायै नमः।

    108.ॐ श्री तुलस्यै नमः।

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