Papmochani Ekadashi के दिन अनजाने में भी न करें ये गलतियां, वरना अधूरा रह जाएगा व्रत
पापमोचनी एकादशी (Papmochani Ekadashi 2026) चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष में आती है और अनजाने में किए गए पापों के प्रायश्चित के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती ह ...और पढ़ें

Papmochani Ekadashi 2026: व्रत के नियम। (Ai Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेक्स, नई दिल्ली। Papmochani Ekadashi 2026: चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहा जाता है। जैसा कि इसके नाम से ही साफ है कि पाप को नष्ट करने वाली तिथि। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह एकादशी अनजाने में किए गए पापों के प्रायश्चित के लिए बहुत फलदायी मानी जाती है। साल 2026 में पापमोचनी एकादशी के व्रत को लेकर भक्तों में काफी उत्साह है, लेकिन शास्त्रों में इस दिन के लिए कुछ नियम बताए गए हैं। कहते हैं कि अगर इन नियमों का पालन नहीं किया जाए, तो व्रत का पूरा फल नहीं मिलता है। आइए जानते हैं कि इस दिन आपको किन गलतियों से बचना चाहिए?
भूलकर भी न करें ये गलतियां (Papmochani Ekadashi 2026 Donts)

Ai Generated Image
चावल का सेवन
एकादशी के दिन चावल खाने की पूरी तरह से मनाही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चावल में महर्षि मेधा के अंश का वास होता है, इसलिए इस दिन चावल खाना जीव हत्या के समान माना गया है। चाहे आप व्रत रख रहे हों या नहीं, एकादशी के दिन घर में चावल नहीं बनाना चाहिए।
तुलसी दल तोड़ना
भगवान विष्णु को तुलसी बहुत प्रिय है और उनके भोग में तुलसी का होना बहुत जरूरी होता है, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी माता व्रत रखती हैं, इसलिए इस दिन उन्हें नहीं तोड़ना चाहिए। अगर आपको पूजा के लिए तुलसी चाहिए, तो एक दिन पहले ही तुलसी दल तोड़कर रख लें।
तामसिक भोजन
पापमोचनी एकादशी पर मन का पवित्र होना बहुत जरूरी होता है। इस दिन मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन और मसूर की दाल जैसी तामसिक वस्तुओं का त्याग करना चाहिए। साथ ही दूसरों की बुराई, गुस्सा और झूठ बोलने से बचना चाहिए, वरना व्रत का पूरा फल नहीं मिलता है।
खबरें और भी
ब्रह्मचर्य का पालन
एकादशी की रात को सोना नहीं चाहिए। इस शुभ दिन पर श्री हरि के नामों का कीर्तन करना चाहिए। साथ ही इस दिन पूरी तरह से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
क्या करें? (Papmochani Ekadashi 2026 Dos)
- एकादशी का नियम दशमी की रात से ही शुरू हो जाता है। दशमी को सूर्यास्त के बाद भोजन न करें।
- एकादशी व्रत का फल तभी मिलता है जब आप द्वादशी तिथि के शुभ मुहूर्त में व्रत खोलना करते हैं। ऐसे में हरि वासर यानी द्वादशी तिथि की पहली चौथाई अवधि के दौरान व्रत कभी न खोलें।
- व्रत खोलने से पहले किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को क्षमता अनुसार दान जरूर करें।
यह भी पढ़ें- Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी कब है? यहां नोट करें सही तिथि और शुभ मुहूर्त
यह भी पढ़ें- Papmochani Ekadashi 2026 Date: मार्च में कब है पापमोचनी एकादशी? अभी नोट करें तिथि और शुभ मुहूर्त
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।