3 साल में एक बार आती है 'परमा एकादशी', नोट करें तिथि, पूजा विधि और इसका खास महत्व
आइए इस आर्टिकल में परमा एकादशी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व के बारे में जानते हैं। ...और पढ़ें

Parama Ekadashi: नोट करें परमा एकादशी की तिथि।
HighLights
एकादशी व्रत को सभी व्रतों में सबसे शुभ माना गया है
यह भगवान विष्णु को समर्पित है
इस दिन व्रत रखने से अक्षय फलों की प्राप्ति होती है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में सबसे शुभ माना गया है। आमतौर पर एक साल में 24 एकादशी आती हैं, लेकिन जब हिंदू पंचांग में 'अधिकमास' जुड़ता है, तो इसकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है।
अधिकमास के कृष्ण पक्ष में आने वाली इसी विशेष एकादशी को परमा एकादशी कहा जाता है। यह व्रत तीन साल में केवल एक बार आता है, जिसके कारण इसका धार्मिक महत्व बढ़ जाता है। आइए यहां इसकी सही तिथि से लेकर सभी बातें जानते हैं।

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परमा एकादशी तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, इस बार अधिकमास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 11 जून 2026 की सुबह 12 बजकर 57 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 11 जून को ही रात में 10 बजकर 36 मिनट पर होगा। उदयातिथि के आधार पर इस बार 11 जून 2026, दिन बृहस्पतिवार को परमा एकादशी मनाई जाएगी।
व्रत का विशेष महत्व
परमा का मतलब होता है सर्वश्रेष्ठ। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने से मनुष्य को सोने का दान और अश्वमेध यज्ञ के बराबर फल मिलता है। यह व्रत जीवन से घोर दरिद्रता, आर्थिक तंगी और पापों का नाश करता है। भगवान कृष्ण ने अर्जुन को इस व्रत की महिमा बताते हुए कहा था कि जो व्यक्ति इस दिन पूरी श्रद्धा से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करता है, उसे मृत्यु के बाद बैकुंठ धाम में स्थान मिलता है।
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पूजा विधि
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
- मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
- उन्हें पीले फूल, ऋतु फल, धूप, दीप और पंचामृत अर्पित करें।
- श्रीहरि को पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं।
- भोग में तुलसी दल जरूर रखें, क्योंकि इसके बिना विष्णु जी भोग स्वीकार नहीं करते।
- भगवान के सामने बैठकर परमा एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
- इसके बाद विष्णु जी और माता लक्ष्मी की आरती करें।
- इस रात को सोना नहीं चाहिए।
- विष्णु सहस्रनाम का पाठ या 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का मानसिक जाप करते हुए रात्रि जागरण करें।
- अगले दिन किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन व दान-दक्षिणा देने के बाद शुभ मुहूर्त में भोजन कर व्रत खोलें।
ध्यान दें ये 2 बातें
- एकादशी के दिन चावल का सेवन पूरी तरह वर्जित होता है।
- इस दिन क्रोध, झूठ और परनिंदा से दूर रहकर मन को पूरी तरह सात्विक रखना चाहिए।
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