पितृपक्ष 2026: पैसों की तंगी से लेकर सेहत तक, पितरों की कृपा से कैसे बदलेगी आपकी किस्मत?
सनातन धर्म में पितृ पक्ष पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करने का समय है, जिनका आशीर्वाद जीवन को ...और पढ़ें

पूर्वजों का आशीर्वाद जीवन पर कैसा प्रभाव डालता है? (Picture Credits - AI Images)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) का समय सिर्फ पूर्वजों को याद करने का ही समय नहीं होता है, बल्कि उनके प्रति कृतज्ञता और सम्मान जाहिर करने का भी सुनहरा मौका है।
हिंदू शास्त्रों के मुताबिक, इन 16 दिनों में हमारे पूर्वज सूक्ष्म रूप में अपने परिवार वालों से मिलने के लिए पृथ्वी लोक पर आते हैं। माना जाता है कि, यदि इस दौरान सच्चे मन और श्रद्धा के साथ विधि विधान से उनका तर्पण, पिंडदान और दान पुण्य किया जाए तो जीवन की समस्त समस्याएं दूर हो जाती हैं।
पितृ पक्ष 2026 की डेट
इस साल पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर 2026, शनिवार से हुई थी, जो 10 अक्टूबर 2026 तक चलेंगे। पूर्वजों को समर्पित इस खास अवधि में लोग अपने पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने कई तरह के कर्मकांड करते हैं। लेकिन क्या अपने कभी सोचा है कि, हमारे पूर्वज हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करते हैं? आइए जानते हैं इसके बारे में।
अथर्ववेद में 'पितृषु स्वधावत्' का मतलब है कि, पूर्वजों को याद करके उन्हें श्रद्धा, जल और भोजन अर्पित करना है। यह शब्द हमें याद दिलाता है कि, हमारे पूर्वजों का आशीर्वाद हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करता है।
हमें अपने पूर्वजों की आत्माओं के प्रति हमेशा कृतज्ञता की भावना रखनी चाहिए। वे हमारे जीवन में मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं। उनका आशीर्वाद हमें जीवन में सफल और समृद्ध बनाने का काम करता है, जबकि पूर्वजों का अपमान, उनके प्रति किसी भी तरह की सेवा भावना या कर्मकांड न करने से जीवन में विपरीत परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
पूर्वजों का आशीर्वाद जीवन पर कैसा प्रभाव डालता है?
हमारे पूर्वजों का आशीर्वाद हमारे जीवन का सबसे जरूरी अंग है। यह हमारे मन, शरीर, आत्मा को संतुलित करने का काम करता है। जब हम अपने पितरों के प्रति सम्मान की भावना रखते हैं, तो उनका आशीर्वाद हमें मानसिक शांति और सकारात्मकता प्राप्त होती है। यह पॉजिटिव सोच हमारे जीवन में पैसा, सेहत और सफलता लाने में मदद करती है।
अथर्ववेद समेत कई धार्मिक ग्रंथों में इस बात का जिक्र किया गया है कि, पूर्वजों का आशीर्वाद हमें मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने में मदद करता है। उनके आशीर्वाद से हम जीवन की समस्त चुनौतियों का सामना करने के लिए ताकत और साहस प्राप्त करते हैं। पितरों का आशीर्वाद न सिर्फ हमें आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाने का काम करता है, बल्कि जीवन की भौतिक जरूरतों को भी पूरा करने का काम करता है।
पितरों की नाराजगी बनती है पितृ दोष का कारण
पितृ दोष को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है, क्योंकि यह हमारे जीवन में कई तरह की समस्याएं पैदा कर सकता है। पितृ दोष का मतलब है, पूर्वजों के प्रति हमारे जो कर्तव्य हैं, उनका पालन न करना। जब हम अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता जाहिर नहीं करते या उनके आशीर्वाद की अपेक्षा करते हैं, तो यह पितृ दोष का कारण बनता है।
पितरों की नाराजगी हमारे जीवन में नकारात्मक प्रभाव डालती है। पितृ दोष के लक्षणों में पारिवारिक कलह, मानसिक तनाव, आर्थिक परेशानियां और सेहत से जुड़ी समस्याएं शामिल हो सकती हैं।
यह दोष हमारे में जीवन में अस्थिरता लाने का काम करता है, जो हमें जीवन में आगे बढ़ने नहीं देती है। इसलिए पितृ दोष को पहचानना और उसका निवारण करना बेहद जरूरी है।
पितृ दोष को खत्म करने के सबसे सरल उपाय
पितृ दोष की समस्या का निवारण करने के लिए सबसे पहले हमें अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान और श्रद्धा की भावना रखनी चाहिए। नियमित रूप से तर्पण और श्राद्ध कर्म करना चाहिए, ताकि इस दोष का निवारण हो सके। इसके अलावा हमें अपने पूर्वजों के नाम पर दान और पुण्य का काम भी करना चाहिए।
पितृ दोष की समस्या से जुझने वाले लोगों को 'महामृत्युंजय मंत्र' का भी पाठ करना चाहिए। इस पाठ का जाप खासतौर पर प्रभावी माना गया है।इस तरह पितृ दोष को पहचानना और इसके निवारण के उपाय हमारे जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करने का काम करते हैं।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
