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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 08, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Pradosh Vrat 2025: प्रदोष व्रत के दिन कर लिए ये काम, तो बनी रहेगी महादेव की कृपा

    Updated: Tue, 08 Apr 2025 04:38 PM (GMT+05:30)

    चैत्र माह का आखिरी प्रदोष व्रत 10 मार्च को किया जाएगा। गुरुवार के दिन पड़ने के कारण इसे गुरु प्रदोष व्रत (Guru Pradosh Vrat 2025) कह सकते हैं। इस दिन ...और पढ़ें

    Pradosh Vrat 2025: प्रदोष व्रत के दिन क्या करना चाहिए? (Picture Credit: Freepik)
    Pradosh Vrat 2025: प्रदोष व्रत के दिन क्या करना चाहिए? (Picture Credit: Freepik)

    HighLights

    1. हर माह में दो बार किया जाता है प्रदोष व्रत।
    2. 10 मार्च को किया जाएगा गुरु प्रदोष व्रत।
    3. प्रदोष व्रत करने से मिलती है शिव जी की कृपा।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर महीने की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है, इस प्रकार महीने में दो बार प्रदोष व्रत आता है। यह तिथि भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए काफी खास मानी गई है। ऐसे में अगर आप गुरु प्रदोष व्रत के दिन ये काम करते हैं, तो इससे आपको शिव जी की विशेष कृपा की प्राप्ति हो सकती है।

    इस विधि से करें पूजा (Pradosh Vrat Puja vidhi)

    प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर शिव जी का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें। स्नान करने के बाद पूजा स्थल की अच्छे से साफ-सफाई कर लें। इसके बाद घर में ही या फिर मंदिर जाकर शिवलिंग का साधारण जल में थोड़ा-सा गंगा जल मिलाकर अभिषेक करें।

    इसके बाद शिव जी को दही, शहद, बेलपत्र आदि अर्पित करें और सफेद वस्तु जैसे मिठाई आदि का भोग लगाएं। इस दौरान मन-ही-मन ॐ नमः शिवाय: का जप करते रहें। अंत में घी का दीपक जलाकर शिव जी का आरती करें।

    जरूर करें ये काम

    प्रदोष व्रत के दिन जल में काले तिल और गुड़ मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करना काफी शुभ माना जाता है। इसी के साथ गुरु प्रदोष व्रत के दिन दान का भी विशेष महत्व माना गया है। ऐसे में आप इस दिन पर जरूरतमंद लोगों में पीले कपड़े, पीली मिठाई, चने की दाल, हल्दी, आदि का दान कर सकते हैं। इससे महादेव प्रसन्न होते हैं और साधक पर अपनी दया दृष्टि बनाए रखते हैं।

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    जरूर करें ये स्तुति

    ।।संपूर्ण नटराज स्तुति पाठ।।

    सत सृष्टि तांडव रचयिता

    नटराज राज नमो नमः…

    हेआद्य गुरु शंकर पिता

    नटराज राज नमो नमः…

    गंभीर नाद मृदंगना धबके उरे ब्रह्माडना

    नित होत नाद प्रचंडना

    नटराज राज नमो नमः…

    शिर ज्ञान गंगा चंद्रमा चिद्ब्रह्म ज्योति ललाट मां

    विषनाग माला कंठ मां

    नटराज राज नमो नमः…

    तवशक्ति वामांगे स्थिता हे चंद्रिका अपराजिता

    चहु वेद गाए संहिता

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