Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत पर महादेव की ये आरती खोल देगी किस्मत के द्वार, जरूर करें इसका पाठ

    Updated: Fri, 30 Jan 2026 09:02 AM (GMT+05:30)

    प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat 2026) भगवान शिव की पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, जो हर महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि प्रदो ...और पढ़ें

    Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत आरती। (Ai Generated)

    Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत आरती। (Ai Generated)

    HighLights

    1. प्रदोष व्रत का दिन बेहद शुभ माना जाता है

    2. यह दिन भगवान शिव को समर्पित है

    3.  हर महीने की त्रयोदशी तिथि को यह व्रत रखा जाता है

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान शिव की भक्ति के लिए प्रदोष व्रत का दिन किसी वरदान से कम नहीं माना जाता। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने की त्रयोदशी तिथि को यह व्रत रखा जाता है। इस साल प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat 2026) बेहद शुभ संयोग में पड़ रहा है। ऐसी मान्यता है कि व्रत और पूजन के बाद अगर प्रदोष काल में महादेव और देवी शक्ति की विशेष आरती की जाए, तो साधक के जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और सोई हुई किस्मत जाग उठती है, जो इस प्रकार है -

    shiv parvati aarti

    Ai Generated

    ।।शिव जी की आरती।। (Lord Shiv Aarti)

    जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।

    ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव...॥

    एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।

    हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव...॥

    दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।

    त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव...॥

    अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।

    चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव...॥

    श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।

    सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव...॥

    कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।

    जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव...॥

    ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।

    प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव...॥

    काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।

    नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव...॥

    त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।

    कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव...॥

    ।।माता पार्वती की आरती।। (Mata Parvati Ki Aarti)

    जय पार्वती माता जय पार्वती माता

    ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल कदा दाता।

    जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

    अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता

    जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुणगु गाता।

    जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

    सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा

    देव वधुजहं गावत नृत्य कर ताथा।

    जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

    सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता

    हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता।

    जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

    शुम्भ निशुम्भ विदारेहेमांचल स्याता

    सहस भुजा तनुधरिके चक्र लियो हाथा।

    जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

    सृष्ट‍ि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता

    नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता।

    जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

    देवन अरज करत हम चित को लाता

    गावत दे दे ताली मन मेंरंगराता।

    जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

    श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता

    सदा सुखी रहता सुख संपति पाता।

    जय पार्वती माता मैया जय पार्वती माता।

    यह भी पढ़ें- Pradosh Vrat 2026: जनवरी का आखिरी प्रदोष व्रत, दांपत्य जीवन में खुशहाली के लिए ऐसे करें पूजा

    यह भी पढ़ें- Pradosh Vrat 2026 Date: फरवरी में कब किया जाएगा प्रदोष व्रत, पढ़ें क्या रहेगा पूजा का शुभ मुहूर्त?

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।