रक्षाबंधन पर पंचक के बीच राखी बांधना शुभ या अशुभ? दूर करें हर कंफ्यूजन
इस बार रक्षाबंधन 28 अगस्त (Raksha Bandhan 2026) को मनाया जाएगा, जिस दिन पंचक का साया रहेगा लेकिन भद्रा नहीं ...और पढ़ें
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किस मुहूर्त में बांधे राखी? (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
रक्षाबंधन 28 अगस्त को, इस बार भद्रा का साया नहीं।
ज्योतिषियों के अनुसार, पंचक में भी राखी बांधना शुभ है।
पंचक 27 अगस्त दोपहर से 1 सितंबर सुबह तक रहेगा।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा। रक्षाबंधन (Raksha Bandhan 2026) के दिन भद्रा काल के दौरान राखी बांधने की मनाही है। इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा काल का साया नहीं रहेगा, लेकिन पंचक का साया जरूर रहेगा। अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि क्या रक्षाबंधन के दिन पंचक के दौरान राखी बांधी जा सकती है। ऐसे में आइए आपके इस सवाल का जवाब में इस आर्टिकल में बताते हैं।
एस्ट्रोपत्री के श्री चंद्रेश शर्मा जी बताते हैं कि पंचक को लेकर लोगों में अक्सर कई तरह की भ्रांतियां रहती हैं, लेकिन रक्षाबंधन के संदर्भ में शास्त्रों का नियम अत्यंत स्पष्ट है।
क्या पंचक में बांधी जा सकती है राखी?
ज्योतिषी मत: हां, पंचक में राखी बांधी जा सकती है।
पंचक के वर्जित कार्य: पंचक का विचार मुख्य रूप से गृह निर्माण, लकड़ी एकत्र करने, दक्षिण दिशा की यात्रा या शव दाह जैसे विशिष्ट कार्यों के लिए ही किया जाता है।
रक्षाबंधन पर प्रभाव: रक्षाबंधन एक अत्यंत शुभ त्योहार और भाई-बहन के प्रेम का रक्षा पर्व है। इस पावन अवसर पर पंचक का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता (बशर्ते उस समय 'भद्रा' न लगी हो)।
अगस्त में कब से शुरू होंगे पंचक
पंचक की शुरुआत 27 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 35 मिनट से होगी। वहीं, इसका समापन 1 सितंबर को सुबह 3 बजकर 24 मिनट पर होगा।
रक्षाबंधन डेट और शुभ मुहूर्त (Raksha Bandhan Date and shubh muhurat)
वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 27 अगस्त को प्रातः 09 बजकर 08 मिनट से होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 28 अगस्त को प्रातः 09 बजकर 48 मिनट पर होगा। उदया तिथि की मानें तो इस साल रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन राखी बांधने का (Rakhi Muhurat 28 august 2026) मुहूर्त प्रातः 06 बजकर 23 मिनट से प्रातः 09 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।
पंचक में क्या करें?
- पूजा-पाठ और अध्यात्म- भगवान की पूजा, मंत्र जाप, व्रत, कथा और दान-पुण्य करने पर कोई रोक नहीं है। बल्कि इस दौरान की गई ईश्वर की आराधना शुभ फल देती है।
- इसके अलावा पंचक के दौरान पूजा-अर्चना करने के बाद दान कर सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि दान करने से धन लाभ के योग बनते हैं।
- सामान्य खरीदारी-इसके अलावा कपड़े, आभूषण, वाहन, या घर के लिए दैनिक उपयोग का सामान खरीदा जा सकता है।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
