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    सिर पर 'मदार' के पत्ते रखकर क्यों करते हैं रथ सप्तमी स्नान? जानें इस अनोखी परंपरा के पीछे का आयुर्वेद

    Updated: Thu, 22 Jan 2026 04:27 PM (IST)

    Rath Saptami 2026: रथ सप्तमी पर सिर पर मदार (अर्क) के पत्ते रखकर स्नान क्यों किया जाता है? जानें इस परंपरा के पीछे छिपे सात जन्मों के पापों से मुक्ति ...और पढ़ें

    रथ सप्तमी पर मदार के पत्तों से स्नान करने का विधान

    रथ सप्तमी पर मदार के पत्तों से स्नान करने का विधान

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रथ सप्तमी का पर्व हिंदू धर्म (Hindu Religion) में भगवान सूर्य के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सूर्य देव की उपासना के साथ-साथ एक विशेष प्रकार के स्नान की परंपरा है, जिसे 'अर्क स्नान' कहा जाता है। इसमें सिर और कंधों पर 'मदार' (जिसे अर्क या आक भी कहते हैं) के पत्ते रखकर स्नान किया जाता है।

    क्या है यह परंपरा?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ मास (Magh Maas) के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को सूर्य देव अपने सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर प्रकट हुए थे। इस दिन सप्तमी होने के कारण सात मदार के पत्तों का विशेष महत्व है। परंपरा के अनुसार, स्नान करते समय सात पत्ते, एक सिर पर, दो कंधों पर, दो घुटनों पर और दो पैरों पर रखकर जल अर्पित किया जाता है। पौराणिक कथाओं और धर्मग्रंथों में वर्णित है कि ऐसा करने से सात जन्मों के पाप धुल जाते हैं और व्यक्ति को आरोग्य की प्राप्ति होती है।

    परंपरा के पीछे का आयुर्वेद और विज्ञान

    सिर पर मदार के पत्ते रखकर स्नान करना केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा आयुर्वेदिक और वैज्ञानिक आधार भी है:

    1. त्वचा और चर्म रोगों का उपचार: मदार का पौधा अपनी औषधीय शक्तियों के लिए जाना जाता है। आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, मदार में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-फंगल गुण होते हैं। जब सूर्य की पहली किरणों की उपस्थिति में मदार के पत्तों के स्पर्श के साथ जल शरीर पर गिरता है, तो यह त्वचा संबंधी विकारों को दूर करने में सहायक होता है।

    2. माइग्रेन और मानसिक शांति: स्नान के दौरान सिर पर पत्ता रखना शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है। प्राचीन उपचार पद्धतियों में बताया गया है कि मदार के पत्तों का स्पर्श सिरदर्द, माइग्रेन और तनाव को कम करने में प्रभावी होता है। यह मस्तिष्क की नसों को शीतलता प्रदान करता है।

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    3. विटामिन D का बेहतर अवशोषण: रथ सप्तमी वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है। इस समय सूर्य की किरणें स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी होती हैं। मदार के पत्ते सूर्य की ऊर्जा को अवशोषित करने में मदद करते हैं, जिससे शरीर को पर्याप्त विटामिन D मिलता है और हड्डियां मजबूत होती हैं।

    स्नान की विधि और महत्व

    स्नान करते समय सूर्य देव का ध्यान करना और "ॐ घृणि सूर्याय नमः" का जाप करना शुभ माना जाता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस दिन किया गया दान और स्नान अक्षय फल प्रदान करता है और कुंडली में सूर्य की स्थिति को मजबूत बनाता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।