रावण ने कैसे बनाई थी रुद्र वीणा? पढ़ें इस दिव्य वाद्य यंत्र की अनोखी कहानीी
रावण ने ऋषि अगस्त्य से प्रेरणा लेकर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए रुद्र वीणा का निर्माण किया था। ...और पढ़ें

रावण की रुद्र वीणा: शिव को समर्पित दिव्य वाद्य यंत्र की अद्भुत कहानी (Picture Credit: AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रामायण ग्रंथ की कई ऐसी कहानियां हैं जिनके रहस्य के बारे में हम सभी अनजान हैं। इसमें कुछ ऐसी कथाओं का वर्णन भी मिलता है जब धरती पर असुरों का वास था और उनमें से एक नाम हर लोक में गूंजता था जो इंसानों और देवताओं, दोनों को ही डरता था, वो नाम था रावण।
वह एक ताकतवर असुर जो कई जादुई कलाओं का माहिर था, जिसने दिव्य 'शिव तांडव' स्त्रोत की रचना तो की ही और उसके भीतर कुछ ऐसी शक्तियां भी थीं जो उसे लोगों के बीच में एक अहम स्थान देती थीं। रावण ने कुछ ऐसी चीजों का भी निर्माण किया जो शायद ही किसी को ज्ञात हो।
उनमें से एक थी वीणा, इस वाद्य यंत्र को सबसे शक्तिशाली ध्वनि का यंत्र कहा गया। आइए आपको बताते हैं इस वीणा की रचना के पीछे की कहानी।
लंकापति रावण और ऋषि अगस्त्य के बीच प्रतिस्पर्धा
एक बार लंकापति रावण और ऋषि अगस्त्य के बीच एक मुकाबला हुआ और उसमें यह तय हुआ कि जो भी इसमें जीतेगा, उसे पूरे ब्रह्मांड का सबसे शक्तिशाली प्राणी कहा जाएगा।
वह स्पर्धा यह थी कि एक पर्वत के सामने बैठ कर दोनों में से जो भी पहले अपनी विद्या और सिद्धि से उस पर्वत को पिघलाएगा वह इस स्पर्धा का विजेता होगा और जब स्पर्धा शुरू हुई तब ऋषि अगस्त्य ने एक वीणा लेकर उसे बजाना शुरू कर दिया और देखते ही देखते उनके संगीत से और वीणा की ध्वनि से वह पर्वत तुरंत पिघल गया।
जब रावण की बारी आई तभी उन्होंने अपनी पूरी सिद्धि और शक्ति से उस पर्वत को पिघलाने की कोशिश की लेकिन व असफल हो गए।
कैसे की रावण ने रूद्र वीणा की रचना?
जब रावण प्रतिस्पर्धा में पराजित हो गया उस समय उन्होंने ऋषि अगस्त्य के सामने हार मान ली और नत मस्तक होकर उनसे उस वीणा का रहस्य पूछा।
रावण ने ऋषि से पूछा कि 'आपके पास ऐसी कौन सी सिद्धि है जिससे यह कार्य सिद्ध हुआ'। उस समय ऋषि ने उन्हें यह बात बताई कि जिस वीणा को उन्होंने बजाया उसकी तार जो थी वो याजी नामक एक प्राणी की नस से बनी हुई थी और इस तरह ऋषि अगस्त्य ने ने रावण को यह महा ज्ञान दिया जिसका उपयोग करके रावण ने शिवजी को प्रसन्न करने के लिए रुद्र वीणा की रचना की।
रावण की वीणा का नाम रूद्र वीणा क्यों था?
रावण भगवान शिव का पार्कम भक्त था और जब उसने वीणा का निर्माण किया तब उसका नाम रुद्र वीणा रखा क्योंकि भगवान शिव का एक नाम 'रुद्र' है और शिव जी को प्रसन्न करने के लिए ही इस वीणा का निर्माण किया गया था।
रुद्र वीणा का अर्थ है 'शिव की वीणा'। रावण ने इस वीणा का निर्माण भगवान शिव को ही उपहार में देने के लिए किया था, जो बाद में रावण का ही एक वाद्य यंत्र बन गई। इस वीणा में इतनी शक्ति थी कि जब इसे बजाय जाता था तब आस-पास की मूर्तियां भी जीवित हो जाती थीं।
रूद्र वीणा वास्तव में एक ऐसा अनोखा वाद्य यंत्र माना जाता है जिसे आज भी रावण की एक अद्भुत कृति के रूप में देखा जाता है।
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