कठिन समय में नहीं टूटेगा धैर्य, रोज पढ़ें रामचरितमानस की ये 3 चौपाइयां; मिलेगी मानसिक शांति
कठिन समय में धैर्य और मानसिक शांति बनाए रखने के लिए रामचरितमानस की कुछ चौपाइयों का पाठ सहायक हो सकता है। ये चौपाइयां मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाकर जीवन को सुखमय बनाने में मदद करती हैं।

मुश्किल वक्त में धैर्य बनाए रखने के लिए पढ़ें रामचरितमानस की ये चौपाइयां
HighLights
रामचरितमानस की चौपाइयां धैर्य और शांति देती हैं।
प्रभु राम की कृपा से सभी दोष मिटते हैं।
कठिन समय में मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कई बार व्यक्ति की लाख कोशिशों के बाद भी सफलता नहीं मिलती है ऐसे में उसका धैर्य खोने लगता है। इन परिस्थितियों में ऐसा लगता है कि जीवन व्यर्थ है और आगे कुछ भी अच्छा नहीं हो सकता है।
ऐसे विचार किसी भी व्यक्ति को मानसिक तनाव में डालने लगते हैं और उसके बनते काम भी बिगड़ने लगते हैं। ऐसे में रामचरितमानस की कुछ चौपाइयों का पाठ जीवन में धैर्य बनाए रखने में आपकी मदद कर सकता है।
ऐसा माना जाता है कि रामायण में कई ऐसी चौपाइयां हैं जो व्यक्ति को मानसिक तनाव से बाहर निकाल सकती हैं जीवन को सुखमय बना सकती हैं। आइए जानें आपको कठिनाई भरे समय में कौन सी चौपाइयों का पाठ करना चाहिए।
चौपाई-1
जेहि पर कृपा करहिं जनु जानी। कवि उर अजिर नचावहिं बानी।।
मोरि सुधारहिं सो सब भांती। जासु कृपा नहिं कृपा अघाती।।
भावार्थ- इस चौपाई का मतलब यह है कि जिस पर प्रभु श्री राम की कृपा होती है, उसकी वाणी, बुद्धि और जीवन अपने आप ही सुंदर हो जाते हैं। प्रभु राम की कृपा से व्यक्ति के सभी दोष मिट जाते हैं और जीवन भक्ति मार्ग पर चल पड़ता है।
प्रभु मेरा सब तरह से ठीक करेंगे, जिनकी कृपा करने से नहीं अघाती है। राम से उत्तम स्वामी और मेरे जैसा बुरा सेवक, इतने पर भी उन दयानिधि ने अपनी ओर देखकर मेरा पालन किया है। श्रीराम का स्मरण करें और उनके चरणों में अपना मन समर्पित करें।
यदि आप कठिन समय में इस चौपाई का पाठ करेंगे तो जीवन में सफलता मिलेगी और श्री राम के प्रति विश्वास आपको धैर्य बनाए रखने में मदद भी करेगा।

चौपाई-2
होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा ।।
अस कहि लगे जपन हरिनामा। गईं सती जहँ प्रभु सुखधामा ।।
भावार्थ- इस चौपाई का अर्थ यह है कि जीवन में वही होता है जो कुछ राम ने रच रखा है। बिना वजह तर्क करके बात को बढ़ाने से कोई फायदा नहीं है। भविष्य के बारे में सोचकर किसी एक बात को विस्तार देना अनुचित है। यह पंक्ति कहकर शिवजी भगवान श्री हरि का नाम जपने लगे और सतीजी उस स्थान पर पहुंच गईं, जहां सुख के धाम प्रभु श्री रामचंद्रजी थे।
यदि आप भी कठिन परिस्थिति में इस बात का ध्यान रखें कि जीवन में वही होता है जो श्री राम ने रचा है, इसलिए बिना वजह चिंता करके क्या होगा। इस पंक्ति से आपको भी यह प्रेरणा मिल सकती है कि समय हमेशा पक्ष में नहीं होता है, लेकिन प्रभु ने सबके लिए सुख और दुख का सही संतुलन बनाया है।
चौपाई-3
प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कौसलपुर राजा।।
गरल सुधा रिपु करहिं मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई।।
भावार्थ- इन पंक्तियों का अर्थ है कि जो व्यक्ति अयोध्यापुरी के राजा श्री राम को हृदय में रखते हुए अपने सभी काम करता है उसके लिए विष भी अमृत के समान हो जाता है। उससे शत्रु भी मित्रता करने लगते हैं, समुद्र गाय के खुर के समान हो जाता है और अग्नि में शीतलता आ जाती है।
यदि आप अपने जीवन की कठिनाइयों में इन चौपाइयों का पाठ करेंगे तो आपको किसी भी समस्या से बाहर निकलने में मदद मिल सकती है और धैर्य भी बना रहेगा।
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