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तीर्थ यात्रा के समय आपको किन नियमों का पालन करना चाहिए? प्रेमानंद जी से इस रहस्य को समझें

Published: Mon, 31 Aug 2026 04:30 PM (IST)

अगर आप तीर्थ यात्रा पर जाने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए ये जान लेना जरूरी है कि आपको इस दौरान किन नियमों का पालन करना चाहिए।

प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार तीर्थ यात्रा के दौरान इन नियमों का करें पालन (Picture Credit: AI Generated)

प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार तीर्थ यात्रा के दौरान इन नियमों का करें पालन (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. तीर्थ स्थान की मर्यादा और पवित्रता बनाए रखें।

  2. यात्रा के दौरान कम से कम एक दिन उपवास करें।

  3. झूठ बोलने से बचें और सफाई का विशेष ध्यान रखें।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। तीर्थ यात्रा पर जाना अत्यंत पुण्य का काम माना जाता है और इससे मन और अंतरात्मा दोनों की शुद्धि होती है। लोग अपने पापों से मुक्ति पाने और मोक्ष की चाह में धार्मिक स्थल की यात्रा पर जाते हैं।

ऐसा माना जाता है कि तरह-तरह के पापों और मोह-माया के कारण हमारा मन अशुद्ध हो जाता है और तीर्थ यात्रा इन अशुद्धियों को दूर करने का एक माध्यम है।

यही नहीं इससे मन के साथ आत्मा को भी शांति मिलती है। कुछ लोग तीर्थ यात्रा पर इसलिए जाते हैं कि वो अपने सभी बुरे कर्मों की क्षमा मांग सकें, तो कुछ लोग पूर्वजों की आत्मा को शांति दिलाने के लिए तीर्थयात्रा करते हैं। आपका उद्देश्य कोई भी हो, लेकिन यात्रा पर जाने से पहले आपको कुछ विशेष नियमों के बारे में जान लेना चाहिए। आइए आपको बताते हैं प्रेमानंद ही महाराज तीर्थ यात्रा के नियमों के बारे में क्या बताते हैं?

तीर्थ स्थानों की मर्यादा को बनाए रखें

प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं कि यदि आप तीर्थ यात्रा पर जा रहे  हैं तो आपको उस स्थान की मर्यादा को बनाए रखना चाहिए। तीर्थ स्थान को हमेशा एक धार्मिक स्थान ही समझना चाहिए, न कि इसे पिकनिक स्पॉट समझकर इसकी पवित्रता को नष्ट करना चाहिए।

तीर्थ यात्रा पर आपको सांसारिक मोह माया से दूर होकर ईश्वर के ध्यान पर ही मन और शरीर को केंद्रित रखना चाहिए। महाराज जी कहते हैं कि वृंदावन या मथुरा जैसे तीर्थ स्थान की यात्रा को धार्मिक यात्रा ही मानें वहां जाकर केवल फोटो खिंचवाना या खरीदारी करना आपका उद्देश्य नहीं होना चाहिए। पवित्र स्थानों की मर्यादा बनाए रखना सभी के लिए जरूरी है जिससे यात्रा का पूर्ण फल मिले।

तीर्थ यात्रा में उपवास करना चाहिए

प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि आपको तीर्थ यात्रा के दौरान कम से कम एक दिन का उपवास अवश्य रखना चाहिए। इस दौरान आप खान-पान का संयम रखें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।

आप भले ही तीर्थ स्थान पर एक दिन ही रुकें या दो दिन रुकें, लेकिन ब्रह्मचर्य का पालन जरूरी है। इस स्थान पर आपको पिकनिक जैसा माहौल नहीं रखना चाहिए कि बड़ा ही मनोरम दृश्य है और आप उसका आनंद ले रहे हों।

तीर्थयात्रा के दौरान झूठ बोलने से बचें

आपको एक बात का ध्यान रखने की जरूरत है कि आप कभी भी धार्मिक यात्रा पर झूठ न बोलें। प्रेमानंद जी कहते हैं कि पहले के समय में गांव से जब कोई बद्रीनाथ, केदारनाथ जाता था तो वह इस धाम को साक्षी मानकर लोगों से बोलता था कि वो जब इतने बड़े धाम की यात्रा करके आए हैं तो झूठ कैसे बोल सकते हैं। आज के समय में भी आपको इसका ध्यान जरूर रखना चाहिए।

तीर्थ स्थानों पर सफाई बनाए रखें

कई बार लोग बड़े-बड़े तीर्थ स्थानों पर भंडारे का आयोजन भी करते हैं, लेकिन उस स्थान को साफ नहीं रख पाते हैं। लोग दूसरों को भोजन  कराते हैं और गिलास और प्लेट वहीं छोड़कर चले जाते हैं। ऐसे में प्रेमानंद जी कहते हैं कि आप अगर जूठी प्लेट तीर्थस्थानों में छोड़ते हैं और किसी संत का पैर उस पर लग जाए तो आपके भंडारा कराने का पूरा पुण्य नष्ट हो सकता है। इसलिए आप कभी भी तीर्थ स्थानों को गंदा न करें, बल्कि सफाई बनाए रखना जरूरी है।

इसके अलावा तीर्थस्थानों पर आपको हमेशा अच्छी भावना के साथ ही जाना चाहिए। ऐसा भी हो सकता है कि जैसे आपके मन में अगर पाप की भावना है और आप दर्शन के लिए जा रहे हैं तो आपको दर्शन ही न हो पाएं। इसलिए अगर आप भी किसी तीर्थ यात्रा पर जाने की योजना बना रहे हैं तो आपको इन बातों का ध्यान रखने की जरूरत है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।