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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 26, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Saphala Ekadashi Vrat 2024: सफला एकादशी का इस विधि से करें पारण, व्रत का मिलेगा पूरा फल

    Updated: Thu, 26 Dec 2024 09:54 AM (IST)

    इस साल की अंतिम सफला एकादशी आज यानी 26 दिसंबर को मनाई जा रही है। इस पावन तिथि पर लोग श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करते हैं। वहीं जो ...और पढ़ें

    Saphala Ekadashi Vrat 2024: सफला एकादशी व्रत का ऐसे करें पारण।
    Saphala Ekadashi Vrat 2024: सफला एकादशी व्रत का ऐसे करें पारण।

    HighLights

    1. एकादशी वर्ष के प्रमुख व्रतों में से एक है।
    2. एकादशी व्रत भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है।
    3. एकादशी माह में दो बार शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में आती है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सफला एकादशी का व्रत बेहद शुभ माना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। इस दिन श्री हरि के भक्त उनका आशीर्वाद पाने के लिए व्रत रखते हैं और विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल 2024 की आखिरी एकादशी का व्रत आज यानी 26 दिसंबर को रखा जा रहा है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत का पालन करने से विष्णु जी के कृपा के साथ मोक्ष की प्राप्ति होती है।

    वहीं, इस दिन (Saphala Ekadashi Vrat 2024) का कुछ लोग व्रत तो रखते, लेकिन उसका पारण सही विधि से नहीं करते हैं, जिससे व्रत का पूरा फल नहीं मिलता है, तो आइए यहां पर पारण का सही नियम जानते हैं।

    सफला एकादशी शुभ मुहूर्त (Saphala Ekadashi Shubh Muhurat)

    हिंदू पंचांग के अनुसार, आज यानी सफला एकादशी पर स्वाति और विशाखा योग बन रहा है। वहीं, इस पावन दिन पर बव एवं बालव करण का भी शुभ संयोग है। इसके साथ ही विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 05 मिनट से 02 बजकर 47 मिनट तक रहेगा।

    फिर गोधूलि मुहूर्त शाम 05 बजकर 29 मिनट से 05 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। कहते हैं कि इस दौरान पूजा-पाठ करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

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    सफला एकादशी व्रत पारण नियम (Saphala Ekadashi Vrat Parana Niyam)

    • साधक सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
    • फिर विधिवत पूजा करें, दीपक जलाएं, तुलसी पत्र, फल, मिठाई, पंचामृत और सूखे मेवे आदि चीजें अर्पित करें।
    • इसके बाद व्रती पूजा और उपवास में हुई गलती के लिए क्षमा याचना करें।
    • भगवान विष्णु के वैदिक मंत्रों का जाप करें, विष्णु सहस्रनाम और श्री हरि स्तोत्र का भी पाठ करें।
    • आरती से पूजा का समापन करें।
    • प्रसाद का वितरण परिवार के सदस्य व अन्य लोगों में करें।
    • जरूरतमंदों की मदद करें और उन्हें भोजन खिलाएं व धन का दान करें।।
    • बड़ों का आशीर्वाद लें।
    • श्री हरि का ध्यान करते हुए फिर प्रसाद या तुलसी पत्र खाकर व्रत का पारण करें और सात्विक भोजन ग्रहण करें।
    • पारण के दौरान तामसिक चीजों से पूरी तरह परहेज करें।

    पूजा के समय करें इन मंत्रों का जाप (Vishnu ji Ke Pujan Mantra)

    • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।।
    • ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि।

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    ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।।

  • ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।
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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।