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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 26, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Satyanarayan Vrat 2023: इस विधि से करें श्री सत्यनारायण भगवान की पूजा, जानें अनुष्ठान का सही तरीका

By Vaishnavi DwivediEdited By: Vaishnavi Dwivedi
Published: Sun, 26 Nov 2023 10:46 AM (IST)Updated: Sun, 26 Nov 2023 03:14 PM (IST)

Satyanarayan Vrat 2023 कार्तिक पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण भगवान का व्रत रखने का विधान है। इस व्रत से लोगों को ...और पढ़ें

Satyanarayan Vrat 2023: श्री सत्यनारायण व्रत पूजा विधि
Satyanarayan Vrat 2023: श्री सत्यनारायण व्रत पूजा विधि

HighLights

  1. कार्तिक पूर्णिमा का दिन श्री हरि विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है।
  2. कार्तिक पूर्णिमा पर लोग सत्यनारायण भगवान के लिए व्रत रखते हैं।
  3. सत्यनारायण पूजा से लोगों को भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Satyanarayan Vrat 2023: कार्तिक पूर्णिमा का दिन श्री हरि विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। इस दिन पर लोग सत्यनारायण भगवान के लिए व्रत रखते हैं। ऐसा माना जाता है सत्यनारायण व्रत करने से लोगों को भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है और सभी प्रकार की समस्याओं से मुक्ति मिलती है। साथ ही लोगों को मनचाही मनोकामना पूरी होने का आशीर्वाद भी मिलता है। इसके साथ ही कहा जाता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणें सीधे पृथ्वी पर पड़ती हैं, जो बेहद शुभ माना जाता है।

श्री सत्यनारायण व्रत तिथि

पूर्णिमा तिथि आरंभ - 26 नवंबर 2023 - दोपहर 03:53

पूर्णिमा तिथि समाप्त - 27 नवंबर, 2023 - दोपहर 02:45

श्री सत्यनारायण मंत्र

ॐ श्री सत्यनारायणाय नमः

शर्करास्नानं समर्पयामि

शर्करा स्नानान्ते पुनः शुद्धोदक स्नानं समर्पयामि

श्री सत्यनारायण व्रत पूजा विधि

  • भक्त सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करें।
  • अपने घर और मंदिर को साफ करें।
  • भगवान सूर्य को अर्घ्य दें और उनके मंत्रों का जाप करें।
  • एक लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और भगवान सत्यनारायण की प्रतिमा स्थापित करें।
  • गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें।
  • हल्दी या चंदन का तिलक लगाएं।
  • पीले फूलों की माला अर्पित करें।
  • देशी घी का दीया भगवान सत्यनारायण की प्रतिमा के सामने जलाएं।
  • सत्यनारायण व्रत कथा पढ़ें या सुनें और अंत में भगवान सत्यनारायण की आरती करें।
  • भोग प्रसाद परिवार के सभी सदस्यों में बांटें।
  • प्रसाद खाकर अपने व्रत का पारण करें और सात्विक भोजन से व्रत खोलें।
  • इस शुभ दिन पर किसी भी तामसिक भोजन का सेवन भूलकर भी न करें।

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