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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 15, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Sawan Somvar 2025 : कितने मुखी होते हैं रुद्राक्ष, जानिए किसे पहनने से मिलता है क्या लाभ

    Updated: Tue, 15 Jul 2025 04:39 PM (GMT+05:30)

    रुद्राक्ष को हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इसका संबंध भगवान शिव से है। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने कई वर्षों तक कठोर तपस्या ...और पढ़ें

    रुद्राक्ष कई तरह के होते हैं, सभी का प्रभाव अलग-अलग होता है।
    रुद्राक्ष कई तरह के होते हैं, सभी का प्रभाव अलग-अलग होता है।

    HighLights

    1. रुद्राक्ष को कलाई, कंठ और ह्रदय पर धारण किया जाना चाहिए।
    2. कलाई पर 12, कंठ पर 36 और ह्रदय पर 108 दाने पहनने चाहिए।
    3. रुद्राक्ष पहनने वालों को सात्विक और शुद्ध आचरण रखना चाहिए।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन का पवित्र महीना (sawan 2025) चल रहा है। इस समय में भोलनाथ के भक्त अपने आराध्य को प्रसन्न करने के लिए पूजा और रुद्राभिषेक करते हैं। इसके साथ ही रुद्राक्ष को भी धारण करते हैं।

    मान्यता है कि इसे पहनने से शिवजी की कृपा (Rudraksha benefits) बनी रहती है। यह रोग और दोष को दूर करता है। रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसू से हुई मानी जाती है। इसलिए वह भोलेनाथ को बहुत प्रिय है।

    हर रुद्राक्ष की अपनी विशेष ऊर्जा होती है। इसे धारण करने पर यह चमत्कारी लाभ प्रदान करता है। रुद्राक्ष मुख्य रूप से 1 मुखी से लेकर 21 मुखी (types of Rudraksha) तक पाए जाते हैं। मगर, इनमें से सिर्फ 14 मुखी रुद्राक्ष को ही धारण किया जाता है। 

    रुद्राक्ष के प्रकार और लाभ 

    • 1 मुखी रुद्राक्ष को भगवान शिव का स्वरूप माना जाता है। कहते हैं कि इसे धारण करने से मानसिक शांति और मोक्ष मिलता है। नेत्र, सिरदर्द , हृदय रोग, त्वचा रोग, उदर रोग आदि रोगों में कारगर होता है। 
    • वहीं, दो मुखी रुद्राक्ष धारण करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं। चंद्रमा के दोषों का निवारण होता है। साथ ही हृदय, फेफड़ा, मस्तिष्क, वाम नेत्र, गुर्दा, भोजन नली आदि रोगों का निवारण होता है। 
    • तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करने से शरीरिक पाप नष्ट होते हैं। मंगल के दोषों का निवारण होता है। यह रक्त, मस्तक, ग्रीवा, कान, अंडकोष, अस्थिमज्जा, गुदा आदि रोगों के निवारण के लिए पहना जाता है। 
    • चार मुखी रुद्राक्ष  ब्रह्मा जी का स्वरूप माना जाता है। इसे धारण करने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। बुध ग्रह के दोषों का निवारण होता है। और मानसिक रोग, पक्षाघात, नासिका रोग, दमा आदि की बीमारी में पहनने से फायदा होता है। 
    • पांच मुखी रुद्राक्ष रुद्र स्वरूप होता है। इसे धारण करने से यश बढ़ता है और पापों का नाश होता है। बृहस्पति के दोषों का निवारण होता है। मज्जा, यकृत, चरण, नितंब आदि रोगों को दूर करने के लिए भी पहना जाता है। 

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    6 से 10 मुखी रुद्राक्ष 

    • छः मुखी रुद्राक्ष को भगवान कार्तिकेय का स्वरूप माना जाता है। इसे धारण करने से शुक्र ग्रह के दोषों का निवारण होता है। खासतौर पर नेत्र, यौन, मुख, मूत्र, ग्रीवा आदि रोगों के निवारण के लिए भी पहना जाता है। 
    • सात मुखी रुद्राक्ष अनंग स्वरूप होता है। इसे धारण करने से विपुल वैभव और आरोग्य मिलता है। शनि की पीड़ा कम होती है। नपुंसकता, पैर, विष, वायु, स्नायु आदि रोगों का निवारण के लिए भी धारण किया जाता है। 
    • आठ मुखी रुद्राक्ष  को भैरव का स्वरूप माना जाता है। राहु के दोषों का निवारण होता है। फेफडे़, पैर, चर्मरोग, मोतिया बिंद, अंडकोष श्वास कष्ट आदि दूर करता है। 
    • नौ मुखी रुद्राक्ष  को मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। केतु ग्रह द्वारा जनित दोषों का निवारण होता है। फेफड़े, ज्वर, नेत्र, उदर, फोड़े-फुंसी, आदि रोगों को दूर करता है। 
    • दस मुखी रुद्राक्ष  को विष्णु स्वरूप माना जाता है। इसे पहनने से दसों दिशाओं में कीर्ति बढ़ती है। नवग्रह शांत होते हैं और समस्त ग्रहों द्वारा उत्पन्न कष्टों का निवारण होता है।

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    11 से 14 मुखी रुद्राक्ष

    • ग्यारह मुखी रुद्राक्ष पहनने से सर्वत्र विजय मिलती है। समस्त ग्रहों द्वारा उत्पन्न कष्टों और रोग-शोक का निवारण होता है। 
    • बारह मुखी रुद्राक्ष कल्प वृक्ष का स्वरूप होता है। इसे पहनने से दरिद्रता नहीं रहती। दुख, निराशा, कुंठा, पीड़ा और दुर्भाग्य दूर होते हैं। 
    • तेरह मुखी रुद्राक्ष धारण करने से दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ता है। सभी पापों से मुक्ति मिलती है और समस्त रोग-शोक का नाश होता है। 
    • चौदह मुखी रुद्राक्ष  को शिव स्वरूप माना जाता है। इससे धारण करने से पापों का नाश होता है। भूत, प्रेत, पिशाच आदि ऊपरी शक्तियों का प्रभाव नहीं होता है। 

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।