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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 27, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Lord Shani: शनिदेव की द्दष्टि क्यों होती है अमंगलकारी? जानिए इसके पीछे की पौराणिक कथा

    Updated: Tue, 27 May 2025 12:45 PM (GMT+05:30)

    सनातन धर्म में शनिदेव की पूजा का महत्व है। शनिदेव न्यायप्रिय हैं और कर्मों के अनुसार फल देते हैं। हालांकि उनकी नजर को अमंगलकारी माना जाता है। लेकिन क् ...और पढ़ें

    Lord Shani: शनिदेव की द्दष्टि क्यों अशुभ मानी जाती है?
    Lord Shani: शनिदेव की द्दष्टि क्यों अशुभ मानी जाती है?

    HighLights

    1. शनिदेव की पूजा का बड़ा ही धार्मिक महत्व है।
    2. शनि देव कर्मों के आधार पर फल देते हैं।
    3. शनि देव की पूजा शाम के समय ज्यादा फलदायी होती है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में शनिदेव की पूजा का बहुत ज्यादा महत्व है। उनकी धीमी चाल और उनकी वक्र दृष्टि से लोग अक्सर भय में रहते हैं। ऐसा माना जाता है कि शनि की अशुभ दृष्टि से व्यक्ति के जीवन में विभिन्न तरह की समस्याएं और बाधाएं आती हैं, लेकिन, क्या आप जानते हैं कि शनिदेव (Lord Shani) की दृष्टि को अमंगलकारी क्यों माना जाता है? तो आइए इसके पीछे की पौराणिक कथा जानते हैं।

    शनिदेव क्यों नीचे रखते हैं अपनी द्दष्टि? (Why Does Shanidev Keep His Gaze Down?)

    प्रचलित हिंदू पौराणिक कथा के अनुसार, शनिदेव का विवाह चित्ररथ की पुत्री चित्रा से हुआ था। चित्रा बहुत बड़ी तपस्विनी और पतिव्रता स्त्री थीं। एक बार चित्रा ने अपने पति शनिदेव का ध्यान किया और उनसे मिलने की इच्छा प्रकट की, लेकिन शनिदेव उस समय भगवान विष्णु के ध्यान में इतने लीन थे कि उन्हें अपनी पत्नी की पुकार सुनाई नहीं दी।

    वे लगातार अपनी तपस्या में लीन रहें, जब ध्यान समाप्त हुआ, तो चित्रा ने क्रोधित होकर शनिदेव को ये श्राप दे दिया कि "आज आपने मुझे अपने ध्यान में लीन रहने के कारण अस्वीकार किया है इसलिए, आज से जिस पर भी आपकी दृष्टि पड़ेगी उसका अनिष्ट हो जाएगा।"

    इसलिए शनि देव को मिला श्राप

    अपनी पत्नी के इस श्राप से शनिदेव बहुत दुखी हुए, क्योंकि वे जानते थे कि उनकी पत्नी एक सती स्त्री थीं और उनका श्राप जरूर सच साबित होगा। उन्होंने अपनी पत्नी को समझाने का प्रयास किया कि वे भगवान विष्णु के ध्यान में लीन थे, इसलिए वे उनकी इच्छा को नहीं सुन पाए। शनिदेव ने अपनी पत्नी से क्षमा मांगी और श्राप वापस लेने को कहा।

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    ऐसे श्राप हुआ कम

    चित्रा को भी अपनी गलती का एहसास हुआ और तब उन्होंने कहा कि ''शनिदेव की दृष्टि केवल तभी अमंगलकारी होगी, जब वे क्रोधित होंगे या किसी पर उनकी सीधी वक्र दृष्टि (Shani Dev Drishti Effects) पड़ेगी। साथ ही उनकी दृष्टि से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए भक्ति और तपस्या ही एक मात्र उपाय होगा।

    न्यायप्रिय हैं शनि देव

    तभी से शनिदेव की दृष्टि अमंगलकारी मानी जाती है। हालांकि ये बात भी सच है कि शनिदेव केवल उन लोगों को कष्ट देते हैं, जो बुरे कर्म करते हैं। वहीं, जो लोग ईमानदारी, न्याय और धर्म के मार्ग पर चलते हैं, उन पर शनिदेव की कृपा सदैव बनी रहती है, क्योंकि शनिदेव न्यायप्रिय देवता हैं और वे व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार ही फल देते हैं।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।