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    पूजा में शंख तो बजाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कब और कैसे हुई इसकी उत्पत्ति?

    Updated: Tue, 07 Apr 2026 02:30 PM (IST)

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा में शंख बजाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता आती है। आइए जानते हैं कि कब और कैसे हुई शंख की उत्पत्ति? ...और पढ़ें

    कैसे हुई शंख की उत्पत्ति (AI Generated Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा के दौरान शंख बजाने से वातावरण में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। जहां तक शंख की ध्वनि जाती है। वहां तक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    घर के मंदिर में शंख (Shankh Significance) को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है और इससे जुड़े नियम का पालन जरूर करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि शंख से जुड़ी कोई गलती करने से व्यक्ति को जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए कहा जाता है कि शंख बजाने से पहले इसके नियम के बारे में जरूर जान लें, लेकिन क्या आप जानते हैं कि शंख की उत्पत्ति कब और कैसे हुई। अगर नहीं पता, तो आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं इसके बारे में।

    shankh sthapana vidhi

    (AI Generated Image)

    इस तरह हुई शंख की उत्पत्ति

    पौराणिक कथा के अनुसार, हजारों वर्ष पहले जब अमृत प्राप्ति के लिए देवताओं और असुरों ने समुद्र मंथन किया, तो उस दौरान समुद्र मंथन से 14 रत्न निकले थे। इन्हीं रत्नों में से एक शंख भी था, जो विशेष रूप से प्रसिद्ध हुआ। इस रत्न की ध्वनि बेहद अद्भुत थी। इसलिए जगत के पालनहार भगवान विष्णु ने इसे धारण कर लिया। तभी से प्रभु के हाथों में शंख सुशोभित है। इस तरह से शंख की उत्पत्ति हुई।

    शास्त्रों में मिलता है वर्णन

    सनातन धर्म में शंख को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसको पूजा के दौरान न बजाने से साधना अधूरी मानी जाती है। इसकी उत्पति का वर्णन श्रीमद्भागवत पुराण और स्कंद पुराण में किया गया है।

    3 प्रकार के होते हैं शंख

    दक्षिणावर्ती शंख- इसे धन की देवी मां लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मंदिर में दक्षिणावर्ती शंख होने से जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं होती है।

    वामावर्ती शंख- पूजा के दौरान वामावर्ती शंख को बजाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस शंख को बजाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

    मध्यावर्ती या गणेश शंख- इस शंख को भगवान गणेश का प्रतीक माना जाता है। पूजा के दौरान शंख को बजाने से घर की दरिद्रता दूर होती है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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