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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 22, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Shardiya Navratri 2023 Kanya Pujan: महानवमी को इस विधि से करें कन्या पूजन, घर में होगी धन की वर्षा

    By Vaishnavi DwivediEdited By: Vaishnavi Dwivedi
    Updated: Mon, 23 Oct 2023 08:56 AM (IST)

    Kanya Pujan कन्या पूजा मां दुर्गा की पूजा करने का एक तरीका है। ऐसी मान्यता है कि मां कन्याओं में निवास करती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार कुमारी पूजा ...और पढ़ें

    Kanya Pujan
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    HighLights

    1. कन्या पूजा का अनुष्ठान बेहद महत्वपूर्ण माना गया है।
    2. कन्या पूजा मां दुर्गा की पूजा करने का एक तरीका है।
    3. कन्याएं देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

    नई दिल्ली, अध्यात्म डेस्क। Navratri Kanya Pujan: नवरात्र के दौरान कन्या पूजा का अनुष्ठान बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। साधक कुमारी पूजा अष्टमी तिथि या नवमी तिथि पर करते हैं। इस दौरान व्रती या फिर वे लोग जो अपने घर में कन्या पूजन रखते हैं, उन्हें कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए। ऐसे लोगों को सात्विकता का पालन करना चाहिए।

    साथ ही इस दौरान उन्हीं चीजों को इस्तेमाल करना चाहिए, जिसे आप मां दुर्गा के साथ खुद के उपयोग में शामिल कर सकें।

    महानवमी कन्या पूजन शुभ मुहूर्त

    महानवमी कुमारी पूजा तिथि सोमवार, 23 अक्टूबर 2023

    नवमी तिथि प्रारंभ - 22 अक्टूबर 2023 शाम 07:58 बजे से

    नवमी तिथि समापन - 23 अक्टूबर 2023 शाम 05:44 बजे।

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    कन्या पूजा अनुष्ठान और महत्व

    कन्या पूजा मां दुर्गा की पूजा करने का एक तरीका है। ऐसी मान्यता है कि मां कन्याओं में निवास करती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, कुमारी पूजा के लिए दो से दस वर्ष की कन्या उपयुक्त होती है। ऐसा कहा जाता है कन्याएं देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

    इनकी पूजा से मां दुर्गा का संपूर्ण आशीर्वाद प्राप्त होता है। जो साधक अपने घर में कन्या पूजन करते हैं, उनके घर में दरिद्रता का वास कभी नहीं होता है। कन्या पूजन बेहद पवित्र अनुष्ठान माना गया है।

    कन्या पूजन विधि

    • नौ कन्याओं और एक बालक को घर पर बुलाएं।
    • कन्याओं का स्वागत पूरे भाव से करें।
    • कन्याओं के चरण धोएं।
    • माथे पर अक्षत और कुमकुम लगाएं।
    • कन्याओं को चुनरी ओढ़ाएं।
    • कन्याओं को हलवा-पूड़ी और चना का प्रसाद ग्रहण कराएं।
    • अंत में पैर छूकर श्रद्धा अनुसार दक्षिणा प्रदान करें।

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    डिसक्लेमर: 'इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।'

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