Shardiya Navratri 2025: चमत्कारों से भरे हैं मां दुर्गा के ये पावन धाम, शारदीय नवरात्र में जरूर करें दर्शन
शारदीय नवरात्र का समय बहुत पुण्यदायी माना जाता है। यह मां दुर्गा की पूजा के लिए समर्पित है। आज शारदीय नवरात्र का पहला दिन है। इस दौरान पूजा-पाठ और कठि ...और पढ़ें

HighLights
- आज से शुरू शारदीय नवरात्र।
- आज शारदीय नवरात्र का पहला दिन है।
- यह दिन मां शैलपुत्री को समर्पित है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Shardiya Navratri 2025: शारदीय नवरात्र का समय बहुत शुभ माना जाता है। इस दौरान देश भर के शक्तिपीठों में भक्तों का सैलाब उमड़ता है। इस साल, अगर आप कुछ अलग और अद्भुत मंदिरों का अनुभव लेना चाहते हैं, तो कोलकाता का चाइनीज काली मंदिर, बिलासपुर का वनदेवी मंदिर और चेन्नई का जय दुर्गा पीठम धाम के दर्शन करने जा सकते हैं।
ये मंदिर (Maa Durga Temples) न केवल अपनी अनूठी मान्यताओं और परंपराओं के लिए जाने जाते हैं, बल्कि ये भारत की विभिन्न सांस्कृतिक का अनोखा संगम हैं।

चाइनीज काली मंदिर
कोलकाता के टेंगरा में स्थित यह मंदिर विभिन्न सांस्कृतिक का एक शानदार उदाहरण है। जैसा कि नाम से पता चलता है, इस मंदिर में मां काली की पूजा चीनी समुदाय के लोग भी करते हैं। यहां देवी को प्रसाद के रूप में नूडल्स, चावल और चाइनीज खाना चढ़ाया जाता है। यहां की सबसे अनोखी बात यह है कि धूप की जगह मोमबत्तियां जलाई जाती हैं और यहां आने वाले साधक सिर्फ भारतीय ही नहीं, बल्कि चीन के भी होते हैं। वहीं, नवरात्र के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है, जिसमें भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
वनदेवी मंदिर
बिलासपुर जिले में स्थित वनदेवी मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र है। यह मंदिर घने जंगलों के बीच स्थित है और यह देवी वनदेवी को समर्पित है, जिन्हें स्थानीय लोग जंगल की देवी मानते हैं। यहां की मान्यता है कि देवी वनदेवी जंगल और उसमें रहने वाले जीवों की रक्षा करती हैं। वहीं, इस धाम में आने वाले साधक देवी को पत्थर अर्पित करते हैं।
जय दुर्गा पीठम धाम
दक्षिण भारत में भी मां दुर्गा के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, और चेन्नई का जय दुर्गा पीठम उनमें से एक है। यह मंदिर मां दुर्गा के शक्ति स्वरूप को समर्पित है। इस पवित्र धाम में मां दुर्गा की पूजा के साथ-साथ पारंपरिक तमिल रीति-रिवाजों का पालन भी किया जाता है। नवरात्र के दौरान यहां भव्य उत्सव, संगीत कार्यक्रम और विशेष आरती का आयोजन होता है।
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वहीं, यह मंदिर दक्षिण भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को जानने का एक शानदार अवसर देता है।
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