शुभ कामों में पत्नी को दाएं बैठना चाहिए या बाएं? पढ़ें शास्त्रों का सटीक नियम, वरना अधूरी रह जाएगी पूजा
शास्त्रों के अनुसार, पत्नी को पति के किस तरफ बैठना चाहिए, इसके लिए कामों के हिसाब से नियम बताए गए हैं, चलिए जानते हैं।

Puja Vastu Rules: शुभ कामों में पत्नी के बैठने की सही दिशा क्या है? (Ai Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पत्नी को पति की अर्धांगिनी और वामांगी कहा गया है, जिसका मतलब है शरीर का बायां हिस्सा। अक्सर धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ या सामाजिक कामों के दौरान यह सवाल उठता है कि पत्नी को पति के दाईं ओर बैठना चाहिए या बाईं ओर?
कहा जाता है कि गलत जगह बैठने से न केवल पूजा का फल कम हो सकता है, बल्कि यह शास्त्रों के नियमों को भी तोड़ता है। ऐसे में आइए जानते हैं शुभ कामों में पत्नी को पति के किस ओर बैठना चाहिए?

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कब दाएं बैठना चाहिए?
शास्त्रों के अनुसार, जिन कामों में अधिकार और संकल्प की बात होती है, वहां पत्नी को पति के दाईं ओर बैठना चाहिए।
- यज्ञ और हवन - किसी भी प्रकार के होम-यज्ञ में पत्नी दाएं बैठती है, क्योंकि आहुति दाहिने हाथ से दी जाती है और पत्नी उसमें सहभागी होती है।
- पूजा-पाठ और अनुष्ठान - पूजा-पाठ या किसी विशेष व्रत के पारण के समय पत्नी का स्थान दाहिना ही होता है।
- कन्यादान - विवाह संस्कार के समय यानी कन्यादान करते समय माता (पत्नी) को पिता (पति) के दाईं ओर बैठना चाहिए।
कब बाएं बैठना चाहिए?
सोते समय - शयन के समय पत्नी को पति के बाईं ओर सोना चाहिए, जो प्रेम और सुरक्षा का प्रतीक है।
भोजन और यात्रा - सामान्य भोजन करते समय या कहीं यात्रा पर जाते समय पत्नी को पति के बाईं ओर बैठना चाहिए।
सिंदूर दान और आशीर्वाद - विवाह के समय जब तक सिंदूर दान नहीं होता, वधू बाएं ही बैठती है। साथ ही, किसी बड़े-बुजुर्ग का आशीर्वाद लेते समय भी पत्नी को बाईं ओर खड़ा होना चाहिए।
बाएं और दाएं हिस्से का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पुरुष का दाहिना हिस्सा शक्ति और सूर्य नाड़ी का प्रतीक माना जाता है, जबकि बायां हिस्सा चंद्र नाड़ी और सौम्यता का। पूजा-पाठ के समय जो ऊर्जा प्राप्त होती है, उसे पति-पत्नी मिलकर ग्रहण करते हैं। जब पत्नी धार्मिक कामों में दाईं ओर बैठती है, तो वह पति की शक्ति को पूर्ण करती है, जिससे पूजा का फल अक्षय यानी कभी न समाप्त होने वाला होता है।
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
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