Shivling Niyam: शिवलिंग पर चढ़ाया गया प्रसाद खाना चाहिए या नहीं? क्या कहता है शास्त्र
क्या शिवलिंग पर अर्पित प्रसाद ग्रहण करना वर्जित है? जानें धार्मिक ग्रंथों के अनुसार शिवलिंग के प्रसाद से जुड़े नियम। ...और पढ़ें

किन परिस्थितियों में शिव प्रसाद खाना शुभ माना जाता है? (Image Source: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेक्स, नई दिल्ली। शिवजी की पूजा में अक्सर हमारे मन में एक सवाल उठता है कि क्या शिवलिंग पर चढ़ाया गया प्रसाद खाना चाहिए या नहीं? कई लोग इसे ग्रहण करने से डरते हैं, तो कुछ इसे सौभाग्य मानते हैं। आइए जानते हैं शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस विषय का असली सच क्या है।
शिवलिंग के प्रसाद का रहस्य
हिंदू धर्म में देवी-देवताओं को अर्पित किया गया भोग 'प्रसाद' के रूप में ग्रहण किया जाता है। लेकिन, भगवान शिव के मामले में नियम थोड़े अलग और गहरे हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, शिवलिंग के ऊपर चढ़ाया गया प्रसाद ग्रहण करना वर्जित माना गया है।
शिव पुराण के अनुसार, शिवलिंग पर चढ़ाया गया प्रसाद 'चंड' नामक गण का भाग माना जाता है। अगर कोई व्यक्ति शिवलिंग पर चढ़ा हुआ प्रसाद खाता है, तो उसे 'चंड' के हिस्से को छीनने का दोष लग सकता है। यही कारण है कि पुराने समय से लोग इसे खाने से बचते आए हैं।
शिव प्रसाद की महिमा और नियम
भगवान शिव की दीक्षा लेने वाले पुरुष के लिए सभी प्रकार के शिवलिंगों पर चढ़ाया गया नैवेद्य शुभ और 'महाप्रसाद' के समान होता है। ऐसे भक्तों को शिव का प्रसाद अनिवार्य रूप से ग्रहण करना चाहिए।
खबरें और भी
- विलंब न करें: अगर शिव का प्रसाद सामने आए, तो उसे यह कहकर नहीं टालना चाहिए कि "मैं इसे बाद में ग्रहण करूंगा"
- पाप का भागीदार: जो व्यक्ति महादेव के प्रसाद को स्वीकार करने में देरी करता है या अनादर करता है, वह अनजाने में ही पाप का भागीदार बन जाता है।
- पापों से मुक्ति: शिव पुराण में यहां तक कहा गया है कि अगर ब्रह्म-हत्या जैसा घोर पाप करने वाला व्यक्ति भी शुद्ध मन और पवित्र होकर शिव प्रसाद ग्रहण करता है, तो उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।
क्या हर शिव प्रसाद खाना मना है?
यहां एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंतर है जिसे समझना जरूरी है। शास्त्रों के अनुसार, केवल उसी प्रसाद को ग्रहण करना वर्जित है जो सीधे शिवलिंग के स्पर्श में आता है।
अगर प्रसाद को शिवलिंग से दूर किसी पात्र (थाली) में रखा गया है या भगवान शिव की मूर्ति (जो धातु या पत्थर की बनी हो लेकिन शिवलिंग न हो) के सामने चढ़ाया गया है, तो उसे ग्रहण करने में कोई दोष नहीं है। साथ ही, शालिग्राम या बाणलिंग पर चढ़ाया गया प्रसाद भी अमृत के समान माना जाता है और इसे बिना किसी झिझक के खाया जा सकता है। नर्मदा नदी में मिलने वाले पत्थर से बने शिवलिंग का प्रसाद ग्रहण किया जा सकता है।

(Image Source: AI-Gene)
इन धातु से बने शिवलिंग पर चढ़े प्रसाद खाएं
इसके अलावा किसी धातु (चांदी, तांबा या पीतल) से बने शिवलिंग का प्रसाद भी खा सकते हैं। शिव पुराण के मुताबिक, भगवान शिव की मूर्तियों या तस्वीर पर भी चंड का अधिकार नहीं होता है। इसलिए उस प्रसाद को भी लिया जा सकता है।
यह भी पढ़ें- घर में शिवलिंग की स्थापना करने का है मन, तो जान लें सभी जरूरी नियम
यह भी पढ़ें- 300 साल से ज्यादा पुराना रंग बदलने वाला शिवलिंग, यहां महाशिवरात्रि पर चढ़ाई जाती हैं हजारों कांवड़
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।