विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

दीवाली पर दांतों से सिक्का क्यों छुआते हैं सिंधी लोग? पढ़िए इस अनोखी रस्म का गहरा राज

Published: Fri, 06 Nov 2026 02:00 PM (IST)

सिंधी समाज में दिवाली को 'दीयारी' कहा जाता है और इस त्योहार पर कई खास परंपराएं निभाई जाती हैं। पूजा ...और पढ़ें

सिंधी परंपरा में दीवाली से जुड़ी अनोखी रस्म

सिंधी परंपरा में दीवाली से जुड़ी अनोखी रस्म

HighLights

  1. सिंधी दिवाली को 'दीयारी' कहते हैं, मनाते हैं धूमधाम से।

  2. पूजा के बाद दांतों से सिक्का छूने का रिवाज है।

  3. 'लक्ष्मी आई, दानत वाइ' कहकर गरीबी दूर करते हैं।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज देशभर में धनतेरस का त्योहार मनाया जा रहा है और ठीक एक दिन बाद यानी 8 नवंबर 2026 को दीवाली मनाई जाएगी। देशभर में दीवाली बेहद ही उत्साह और धूमधाम से मनाई जाती है। इस त्योहार के मौके पर कई तरह के धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। सिंधी समाज में भी दीवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा करने के साथ दीपक जलाएं जाते हैं।

सिंधी लोग हर दिवाली पर अपने दांतों पर सिक्का छुआते हैं। इस परंपरा के पीछे एक गहरा आध्यात्मिक महत्व छिपा है। सिंधी लोग दीवाली को अपनी भाषा में 'दीयारी' कहते हैं। कई सिंधी परिवारों में दीवाली से लेकर भाईदूज तक हठालडी (पारंपरिक और पवित्र पूजा संरचना, जो छोटा सा घर या मंदिरनुमा ढांचा होता है) में मां लक्ष्मी और श्री गणेश की मिट्टी से निर्मित प्रतिमा को स्थापित करते हैं।

sindhi diwali traditions why sindhi people touch silver coin to teeth rituals

चांदी का सिक्का क्यों छुआते हैं दांतों से?

सिंधियों में दीवाली के मौके पर परिवार इक्ट्ठा होते हैं और घर में तमाम तरह के व्यंजन बनाते हैं। इसके साथ ही उनके पास देवी लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा के लिए एक खास तरह की थाली होती है जिसमें वे सिंदूर से स्वास्तिक और दूसरे धार्मिक निशान बनाते हैं।

चांदी और सोने के सिक्कों को कच्चे दूध से धोकर थाली में रखा जाता है और चावल, सिंदूर, फूल वगैरह से इसे सजाया जाता है। पूजा के दौरान इस थाली को देवी-देवताओं की मूर्तियों के सामने रखा जाता है।

पूजा खत्म होने के बाद सिंधी लोग ढेर में से एक सिक्का उठाकर उसे धीरे से अपने दांतों पर थपथपाने का रिवाज निभाते हैं। इस रस्म के दौरान 'लक्ष्मी आई, दानत वाइ' कहा जाता है, जिसका मतलब होता है कि देवी लक्ष्मी का आना गरीबी दूर करने का संकेत माना जाता है।

खास तरह के व्यंजन भी बनाए जाते हैं

इसका एक छिपा हुआ संदेश यह भी है कि धन को खत्म नहीं किया जा सकता है। मिठाई खाने के बाद सिंधी लोग मिट्टी के दीये जलाते हैं और धन की देवी मां लक्ष्मी का स्वागत करते हैं और रात भर उनके लिए घर खुले रखते हैं।

सिंधी परिवारों में दीवाली के मौके पर खासतौर पर साईं भाजी यानी 'पालक और चने की दाल की सब्जी' और सात तरह की सब्जियों वाली 'सात भाजी' के साथ चावल बनाए जाते हैं।

यह भी पढ़ें- आखिर क्यों दीवाली पर रातभर खुला रहता है घर का मुख्य दरवाजा? बंद चौखट लौटा सकती है मां लक्ष्मी को वापस!

यह भी पढ़ें- दीवाली की अगली सुबह बिहार में क्यों पीटा जाता है सूप? भोर के 4 बजे गूंजती है 'दरिद्र भगाने' की आवाज

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।