Janki Jayanti: 25 अप्रैल को मनाई जाएगी सीता नवमी, पंडित बमबम झा ने बताया शुभ महूर्त और पूजन विधि
बिहार में 25 अप्रैल 2026 को Sita Navami मनाई जाएगी, जिसे जानकी जयंती के नाम से भी जाना जाता है। ...और पढ़ें

बिहार में सीता नवमी की तैयारियां। ग्राफिक्स एआई जनरेटेड

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संवाद सूत्र, नवहट्टा (सहरसा)। वैशाख शुक्ल नवमी तिथि को सीता जी प्रकट हुई, इसलिए इसे जानकी जयंती या सीता नवमी के नाम से जाना जाता है। इस बार 25 अप्रैल 2026 वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि है।
इसे श्रद्धा व विश्वास के साथ मनाने की तैयारी ग्रामीण इलाके में शुरू हो गई है। प्रखंड के चन्द्रायण , मोहनपुर इस मौके पर विशेष आयोजन होता है। पोखरभिंडा के पंडित बमबम झा ने बताया कि यह दिन स्वयंसिद्ध अबूझ मुहूर्त है।
रवि योग 25 अप्रैल 2026 को सुबह 5:54 बजे से शुरू होकर अगले दिन सुबह 5:53 बजे तक रहेगा। सीता नवमी पर विशेष रूप से माता सीता की उपासना करने से व्यक्ति को विशेष लाभ मिलता है।
साथ ही जीवन में आ रही सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि यह त्योहार रामनवमी के लगभग एक महीने बाद मनाया जाता है। इस शुभ दिन पर अगर हम भगवान श्री राम के साथ माता सीता की भी पूजा करें तो भगवान श्री हरि और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।
सीता माता के जन्म की कहानी
वाल्मिकी रामायण में उद्धृत अंश की चर्चा करते हुए कहा कि एक बार मिथिला में भयंकर सूखा पड़ा था प्रजा में हाहाकार मचा था। जिससे राजा जनक बेहद परेशान हो गए थे। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए उन्हें एक ऋषि ने यज्ञ करने और खुद धरती पर हल चलाने का सुझाव दिया।
राजा जनक ने अपनी प्रजा के लिए यज्ञ करवाया और फिर धरती पर हल चलाने लगे। तभी उनका हल धरती के अंदर किसी वस्तु से टकराया। मिट्टी हटाने पर उन्हें वहां सोने की डलिया में मिट्टी में लिपटी एक सुंदर कन्या मिली। जैसे ही राजा जनक सीता जी को अपने हाथ से उठाया, वैसे ही तेज बारिश शुरू हो गई।